पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में बुधवार को आए बर्फीले तूफान से निचले इलाकों में भी लोग भारी दहशत में जीने को मजबूर हैं। यह तूफान पंचाचूली और सिदमखान की चोटियों से आया था।

सुबह नौ बजे से शुरू हुए तूफान का असर दोपहर एक बजे तक जारी रहा। इस दौरान मुनस्यारी में तेज हवा चली। बर्फीले तूफान को देखते हुए मुनस्यारी और धारचूला तहसील प्रशासन ने अलर्ट घोषित कर दिया।

मुनस्यारी में लोगों ने सुबह नौ बजे के आसपास पंचाचूली और उसके साथ सटी सिदमखान की चोटी से बर्फीला तूफान उठते देखा। कुछ ही मिनटों में खूबसूरत पर्यटन स्थल मुनस्यारी में तेज हवाएं चलने लगीं। मुनस्यारी के लीलम, पातो, क्वीरीजिमिया, साईपोलू, गोरीपार के इलाकों तक बर्फीले तूफान का असर देखा गया।

इन गांवों में करीब दो दर्जन घरों की छत उड़ गई। तहसीलदार खुशाल राम ने बताया कि बर्फीला तूफान आने के बाद अलर्ट घोषित कर दिया गया है। राजस्व कर्मियों को सजग रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वह कच्चे मकानों में न रहें।

धारचूला से मिली खबर के अनुसार तहसील मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर गांव में बर्फीले तूफान के कारण महेंद्र सिंह और जगत सिंह के मकान की छत उड़ गई। अंधड़ से जंगलों में कई पेड़ गिर गए हैं।

बताया गया कि बर्फीले तूफान से हुए नुकसान की सूचना इकट्ठा करने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में संचार की कोई सुविधा नहीं रहती। नुकसान का आंकलन करने में तीन-चार दिन का समय लग सकता है।

उच्च हिमालयी क्षेत्र में इससे पहले 26 दिसंबर 2014 को बर्फीला तूफान आया था। तूफान से हुए नुकसान की पूरी जानकारी प्रशासन के पास एक महीने बाद आ पाई थी। इस समय उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में आबादी नहीं रहती। सभी परिवार माइग्रेशन पर घाटियों में आ जाते हैं। इस कारण ज्यादा नुकसान की आशंका नहीं रहती।

बर्फीले तूफान का कारण
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बर्फीला तूफान आने के पीछे मुख्य कारण हिमस्खलन रहता है, यदि हिमस्खलन और तेज हवा एक साथ मिल जाए तो बर्फीला तूफान बन जाता है। ऐसे तूफान की गति 100 से 150 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है।
मौसम विभाग के उप महानिदेशक डॉ. आनंद शर्मा ने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ की ऊपरी परत खिसकती रहती है। इस सीजन में हिमस्खलन की घटनाएं अक्सर होती हैं।