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उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश में मंगलवार को संयुक्त रूप से मुरादनगर से हरिद्वार तक मेट्रो परियोजना बनाने, जमरानी बांध समझौता ज्ञापन पर दस्तखत करने और 37 नहरों को उत्तराखंड को हस्तांतरित करने सहित विभिन्न मसलों को तय समयसीमा में हल करने पर सहमति बनी।

दोनों राज्यों के बीच यह सहमति देहरादून में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान बनी। बैठक में उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य भी मौजूद रहे।

अस्थायी राजधानी देहरादून में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में वर्षों से लंबित पड़े जामरानी बांध पर दोनों राज्यों के बीच अगले एक महीने में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर सहमति बनी है। बैठक में बताया गया कि समझौता ज्ञापन का मसौदा तैयार कर लिया गया है। उसे दोनों राज्यों की कैबिनेट से जल्द ही अनुमोदित करा कर मंजूरी के लिए केन्द्र सरकार के पास भेजा जाएगा।

जिन नहरों के दोनों सिरे उत्तराखंड में हैं, लेकिन उनका स्वामित्व उत्तर प्रदेश के पास है, उन्हें भी जल्दी ही उत्तराखंड को सौंपने को लेकर सहमति बन गई है। राज्य में ऐसी 37 नहरें हैं, जिनमें से 28 हरिद्वार जिले में और नौ ऊधमसिंहनगर जिले में हैं।

बैठक के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि हरिद्वार में गंगा नदी में गिर रहे नालों को टैप कर उन्हें एक समानांतर कैनाल या पाईपलाईन से बाहर ले जाया जाएगा और इसमें उत्तर प्रदेश सरकार वित्तीय सहयोग देगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बैठक को बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मिलजुल कर ही तरक्की की जा सकती है और आपसी मसले हल होने से दोनों राज्यों के रिश्ते और मजबूत होंगे।

मुरादनगर से हरिद्वार तक नहर के किनारे-किनारे मेट्रो परियोजना शुरू करने के रावत के सुझाव पर उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री यादव ने अपनी सहमति दी और बैठक में तय किया गया कि इसके लिए एक संयुक्त एसपीवी बनाया जाएगा और इसकी फीजीबिलीटी स्टडी भी जल्द करवा ली जाएगी।

शिवपाल यादव ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड एक दूसरे के पूरक हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड की मदद के लिए हमेशा तत्पर है।’ उन्होंने कहा, ‘हरीश रावत के केन्द्रीय मंत्री रहने के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को उनसे काफी सहयोग मिला था।’ बैठक में तय किया गया कि जिन बिन्दूओं पर सहमति बन चुकी है, उन्हें एक निश्चित समयसीमा में हल कर लिया जाएगा।

इसके अलावा, यादव ने पुरानी ऊपरी गंग नहर रुड़की में जल खेलों के लिए सहमति दे दी जो उत्तराखंड में वर्ष 2018 में होने जा रहे राष्ट्रीय खेलों के मद्देनजर बहुत महत्वपूर्ण है। बैठक में उत्तराखंड की भौगोलिक सीमा में स्थित उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के नियंत्रणाधीन भवनों में से लगभग 25 प्रतिशत भवनों को उत्तराखंड को हस्तांतरित करने के लिए भी इस साल 31 मार्च की तिथि तय कर दी गई।

बैठक में रामगंगा में जल संभरण बढ़ाने के लिए भी एक योजना तैयार करने पर सहमति बनी जिसके तहत चमोली में गैरसैंण से प्रारम्भ करते हुए अनेक जलाशय बनाए जाएंगे। टिहरी बांध से प्रभावित हुए गांवों के पुनर्वास के संबंध में भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार मिलकर केंद्र सरकार व टीएचडीसी इंडिया से अनुरोध करेंगे।

इस बात पर भी सहमति बनी कि उत्तर प्रदेश सरकार हरिद्वार में ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारे के लिए अपने स्वामित्व की भूमि उपलब्ध करवाएगी तथा हरिद्वार में ईसाई कब्रिस्तान के लिए भी भूमि देगी। यह भी तय किया गया कि उत्तराखंड की सीमा में स्थित उत्तर प्रदेश की अप्रयोज्य भूमि व सम्पत्ति उत्तराखंड सरकार को बेच दी जाएगी या लीज पर दे दी जाएगी।