नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के साथ एशिया के सबसे बड़े बांध (टिहरी बांध) का दौरा किया। उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों के संयुक्त सहयोग से काली नदी पर बनने वाले पंचेश्वर बांध के निर्माण के मद्देनजर टिहरी बांध के पावर हाउस निर्माण, विद्युत उत्पादन की तकनीकी जानकारी के साथ ही प्रभावित हुए गांवों के पुनर्वास के संबंध में जानकारी ली।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नेपाल के प्रधानमंत्री ओली रविवार सुबह साढ़े दस बजे सेना के हेलीकॉप्टर से कोटी कॉलोनी पहुंचे। वहां केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल और उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने नेपाल के प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री वहां से सीधे व्यू प्वाइंट पर पहुंचे, जहां टीएचडीसी के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यहां पर भागीरथी और भिलंगना नदी का संगम था। वर्तमान में यहां पर टी वन और टी टू सुरंग है। यहीं से पानी अब पावर हाउस में जाता है। झील 42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हुई है। पावर हाउस पहुंचने पर उन्होंने विद्युत उत्पादन और निर्माण की तकनीक के बारे में भी जानकारी ली।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि टिहरी बांध की झील में एक शहर और 125 गांव समाए हुए हैं, जिनका पुनर्वास नई टिहरी, हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून में किया गया है। टीएचडीसी के निदेशक (तकनीकी) डीपी सिंह ने बताया कि 1978 में शुरू हुई यह परियोजना 1988 में टीएचडीसी को सौंपी गई।

परियोजना की शुरुआती लागत 600 करोड़ आंकी गई थी, लेकिन लोगों के पुनर्वास के बाद इस परियोजना पर कुल 19 हजार करोड़ खर्च हुए। वर्तमान में परियोजना से 10 से 15 करोड़ की आय प्रतिदिन हो रही है।

नेपाल के प्रधानमंत्री के इस दौरे में उनकी पत्नी सधिका साकिया, उपप्रधानमंत्री कमल थापा, गृह मंत्री शक्ति बहादुर, वित्त मंत्री विष्णु प्रसाद, टिहरी सांसद मालाराज्य लक्ष्मी शाह, राज्य सभा सांसद तरुण विजय, भारत में नेपाल के राजदूत रणजी राय, नेपाल मामले देख रहे केंद्रीय संयुक्त सचिव अभय ठाकुर, डीआईजी गढ़वाल संजय गुंज्याल, टीएचडीसी के सीएमडी आरटीएस साई शामिल थे।