मेरठ के कारोबारी मनोज गुप्ता का अपहरण पुरकाजी (मुजफ्फरनगर) ब्लॉक प्रमुख के पति विनय त्यागी उर्फ टिंकू ने कराया था। पुलिस ने विनय के रिश्तेदार अंबुज त्यागी सहित दो युवकों को गिरफ्तार करके यह खुलासा किया है। एक मोबाइल कंपनी में काम करने वाले दोनों युवकों पर गैंग को फर्जी आईडी पर चार सिम उपलब्ध कराने का आरोप है। अपहरण में शामिल रही युवती ममता सहित चार अपहरणकर्ता अब भी फरार हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सदानंद दाते और ऑपरेशन टीम के प्रमुख एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि मनोज गुप्ता के अपहरण की साजिश शातिर अपराधी रह चुके और पुरकाजी ब्लॉक प्रमुख के पति विनय त्यागी उर्फ टिंकू निवासी खाईखेडी पुरकाजी ने रची थी। विनय ने गुड़गांव की ममता मसीह की मदद से मनोज को जाल में फंसाया था।

18 फरवरी को मनोज को अगवा करने की साजिश रची गई। मेरठ से दून आते समय भी ममता गैंग के दो साथियों के साथ संपर्क में थी। अपहरणकर्ता देर रात गाड़ी से फार्म हाउस पहुंचे थे। ममता ने फार्म हाउस का दरवाजा खोलकर उन्हें अंदर दाखिल कराया था।

अपहरणकर्ताओं ने बिस्तर पर ही मनोज गुप्ता को दबोच कर उसे बांधने की कोशिश की थी। विरोध के चलते हुई पिटाई में मनोज का होठ फटने से खून बह गया था। बदमाश मनोज को अगवा करके हरिद्वार के रास्ते मुरादाबाद की तरफ गए। ठिकाने पर पहुंचकर मनोज से रकम की डिमांड की गई थी।

एसएसपी ने दावा किया कि पुलिस अपहरणकर्ताओं के आसपास थी, लेकिन गुप्ता की सकुशल रिहाई तक कार्रवाई का रिस्क नहीं लिया। अमरोहा आदि में गुप्ता को आम के बाग में रखा गया था। गढ़ मुक्तेश्वर के आसपास जैसे ही गुप्ता को छोड़ा गया, कुछ मिनट बाद ही दून पुलिस उसके पास पहुंच गई।

विनय ने ही मुजफ्फरनगर के रामपुरी निवासी रिश्तेदार अंबुज त्यागी से फर्जी आईडी पर चार सिम लिए थे। गुप्ता की रिहाई के बाद सिम उपलब्ध कराने के मामले में अंबुज के अलावा उसके साथ काम करने वाले मुजफ्फरनगर के जट नंगला निवासी विकास कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

उत्तर प्रदेश की अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे विनय त्यागी उर्फ टिंकू के खिलाफ करीब 32 मुकदमे दर्ज हैं। लंबे समय तक उस पर एक लाख रुपये का ईनाम रहा है। साल 1985 में मेरठ के सिविल लाइन क्षेत्र में हुए एक अपहरण में पहली बार विनय का नाम पुलिस रिकॉर्ड में आया था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मेरठ, कंकरखेडा, मेडिकल, हरिद्वार के झबरेड़ा, मुजफ्फरनगर के नई मंडी और पुरकाजी में लूट, हत्या, हत्या की कोशिश के मामले उस पर दर्ज हैं। साल 2006 में पुलिस दबाव बढ़ने पर वह दिल्ली के आनंद विहार में हथियार रखने के आरोप में पकड़ा गया था।

फार्म हाउस से मनोज गुप्ता को उठाकर ले जाने में बदमाशों को कई घंटे लग गए। पहले तो हाथ और मुंह पर कपड़ा बांधते हुए बदमाशों को विरोध का सामना करना पड़ा। जैसे-तैसे उसे नशे का इंजेक्शन लगाया गया, लेकिन इंजेक्शन ने देर से काम किया। डेढ़ बजे फार्म हाउस में घुसे बदमाश 5.50 बजे के करीब उसे लेकर निकल सके। बेहोश करने के बाद गुप्ता के चेहरे पर मंकी कैप पहनाकर ले जाया गया।

एसपी सिटी अजय सिंह की अगुवाई वाली ऑपरेशन टीम में शामिल सहायक पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ, सीओ सिटी मनोज क त्याल, सीओ विकासनगर स्वप्न कुमार सिंह, एसओ प्रेमनगर यशपाल बिष्ट, एसओ सहसपुर मुकेश त्यागी, एसओ बसंत विहार अबुल कलाम, नारकोटिक्स सेल के दारोगा रवि सैनी, नेहरू कालोनी चौकी प्रभारी दिलबर सिंह नेगी, जोगीवाला चौकी प्रभारी यादवेंद्र बाजवा, झाझरा चौकी प्रभारी गिरिश नेगी, एसओजी के दारोगा कमल हसन और प्रेमनगर के उप निरीक्षक किशन देवरानी को एसएसपी और आईजी संजय गुंज्याल ने पुरस्कृत करने की घोषणा की है।