देवभूमि उत्तराखंड में लगातार भूकंप के झटके आने से पहाड़ी राज्य के लोग दहशत में हैं। हालांकि कुछ दिनों से लगातार आ रहे भूकंप के इन झटकों की तीव्रता कुछ ज्यादा नहीं है। लेकिन जानकार इन्हें बड़े भूकंप की चेतावनी करार दे रहे हैं।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में रविवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि रविवार दोपहर 1.21 बजे उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए।

इसका केंद्र उत्तरकाशी में पांच किमी गहराई में था और रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। उन्होंने बताया कि कम तीव्रता के भूकंप से जिले में कहीं किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।

इससे पहले चमोली जिले में पिछले सोमवार रात को 10.05 बजे भूकंप का झटका महसूस किया गया था। भूकंप की तीव्रता 3.5 और गहराई 10 किलोमीटर भूमि के अंदर थी। केंद्र जोशीमठ था।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना था कि भूकंप की गहराई अधिक होने से अधिकांश लोगों को झटका महसूस नहीं हुआ। भूकंप से कोई जान-माल का नुकसान भी नहीं हुआ था।

आपदा प्रबंधन में स्थानीय लोगों को शामिल कर पाने में प्रदेश सरकार को खास सफलता नहीं मिल पाई है। हाल ही में भूकंप को लेकर राज्य में हुई मॉक ड्रिल में यह कमी भी सामने आई।

इस मॉक ड्रिल में आपदा प्रबंधन तंत्र की सबसे बड़ी कमी जन सहभागिता के न होने के रूप में सामने आई। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक जन सहभागिता कई रूपों में हो सकती है। लोग अगर भूकंप को लेकर चिंतित हैं तो भूकंप रोधी भवन बनाने को तवज्जो दे सकते हैं।

भूस्खलन क्षेत्रों की स्थानीय लोगों को पहचान होती है, ऐसे स्थानों से लोग खुद ही दूर रह सकते हैं। आपदा प्रबंधन तंत्र के तहत कई नए मोबाइल एप्स विकसित किए जा चुके हैं। आपदा के समय ये एप्स सूचनाओं के आदान प्रदान में मदद करते हैं।

जरूरत इस बात की भी महसूस की गई कि लोगों को इस बात के लिए तैयार किया जाए। आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र के मुताबिक भूकंपरोधी भवन बनाने के लिए राज मिस्त्रियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसी तरह ग्राम पंचायत स्तर पर बचाव दस्ते तैयार किए जा रहे हैं।

प्रदेश में अब तक आपदाओं को लेकर पूर्व चेतावनी का तंत्र पूरी तरह से स्थापित नहीं हो पाया है। डॉप्लर रडार अभी स्थापित किए जाने बाकी है। आटोमेटिक वेदर स्टेशन भी पूरे नहीं लग पाए हैं।

यह भी सामने आया है कि आपदा के दौरान संचार तंत्र विश्वसनीय नहीं रह जाता। इसी स्थिति को देखते हुए इस बार हुई मॉक ड्रिल में सेटेलाइट फोन का विशेष परीक्षण किया गया। अधिकारियों के मुताबिक सेटेलाइट फोन ने बेहतर तरीके से काम किया और यह व्यवस्था कारगर रही।