सांकेतिक तस्वीर

उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान शिक्षकों की हड़ताल के ऐलान पर सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए शिक्षकों और कर्मचारियों की हड़ताल पर एस्मा लगा दिया है। वही, शिक्षकों का कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं तो वह जेल जाने को तैयार हैं।

राज्य में तीन मार्च से उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। इसी दौरान शिक्षकों ने हड़ताल का ऐलान किया है। यदि शिक्षक हड़ताल पर चले गए तो परीक्षा सम्पन्न कराने में दिक्कत आएगी।

इसी को देखते हुए शासन ने हड़ताल पर एस्मा लगा दिया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इसके उल्लंघन पर शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

शिक्षा निदेशक राकेश कुंवर ने कहा कि बच्चों की पूरे साल की पढ़ाई के बाद बोर्ड परीक्षाएं अनिवार्य सेवा है। सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश है कि जून से पहले बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट जारी किया जाए। लोकहित में शासन की ओर से एस्मा लगाया गया है।

शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा राकेश कुंवर ने बताया कि हड़ताल पर रोक लगाई गई है। एक्ट के मुताबिक छह महीने तक शिक्षकों एवं कर्मचारियों की हड़ताल को प्रतिबंधित किया गया है। प्रयास है कि समय पर परीक्षाएं सम्पन्न हों और रिजल्ट घोषित किया जा सके, ताकि बच्चे मई के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।

प्रदेश अध्यक्ष राजकीय शिक्षक संघ राम सिंह चौहान का कहना है कि मांगों के संबंध में कई बार आश्वासन मिला, लेकिन एक भी मांग पूरी नहीं की गई। एस्मा से हम डरने वाले नहीं हैं। जेल भी जाना पड़े तो तैयार हैं।