टिहरी बांध के कारण विस्थापितों को अब अपनी जमीनों को बेचने में कानूनी अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा। विस्थापित अपनी जमीनों को बेच सकें, इसके लिए शासनादेश में संशोधन किया जाएगा। यह निर्णय टिहरी/कोटेश्वर जल विद्युत परियोजनाओं के विस्थापितों की समस्याओं को निवारण के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में लिया गया।

समिति अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह पंवार की अध्यक्षता में हुई बैठक में टिहरी बांध के विस्थापितों के पुनर्वास आवंटित भूखंड, भवन, दुकानों, रजिस्ट्री, भूमिधरी अधिकार सहित विस्थापितों की कई समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में कोटेश्वर बांध प्रभावित दुकानदारों को मुआवजा दिए जाने संबंधी मामलों का निस्तारण नहीं होने, विस्थापितों को आवंटित जमीन और मकान की रजिस्ट्री नहीं करने का मुद्दा भी उठा। टीएचडीसी निदेशक डीवी सिंह ने बताया कि रजिस्ट्री धनराशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है।

जलाशय परिधि में श्मशान घाटों के निर्माण के संबंध में टीएचडीसी निदेशक ने बताया कि 15 मार्च तक पांच करोड़ का बजट टिहरी जिला प्रशासन को सौंप दिए जाएंगे। चिन्यालीसौड़ में 1200 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार भी बनाई जाएगी।

निर्माण कार्य एक मार्च से शुरू हो जाने का आश्वासन निदेशक टीएचडीसी ने दिया। बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह पंवार, उप समिति के सदस्य शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी व पर्यटन मंत्री दिनेश धनै, प्रताप नगर विधायक विक्रम सिंह नेगी के अलावा सचिव सिंचाई आनंद वर्द्धन, डीएम टिहरी ज्योति नीरज खैरवाल, अधीक्षण अभियंता पुनर्वास/सिंचाई आरआर भट्ट, अधिशासी अभियंता पुनर्वास डीके सिंह, महाप्रबंधक टीएचडीसी ओएस मौर्य आदि मौजूद थे।