हाइड्रो पावर कंपनियों से वाटर टैक्स वसूलने को लेकर सरकार, सिंचाई व ऊर्जा विभाग की ओर से बनाई गई योजना पहले चरण में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। टीएचडीसी व जेपी हाइड्रो पावर जैसी कंपनियों ने जहां जलकर देने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं टीएचडीसी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

अदालत की ओर से राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दिया है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) का कहना है कि कंपनी जलकर देने को तैयार है, लेकिन इसका सीधा असर बिजली दरों पर पड़ेगा।

राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर राज्य में संचालित व प्रस्तावित हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट द्वारा नदियों का जल इस्तेमाल करने पर जलकर थोप दिया है। सरकार की ओर से अलग-अलग हाइड्रो प्रोजेक्ट के इसकी दरें भी तय कर दी है। जलकर वसूली के रूप में सरकार ने सालाना 300 करोड़ का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है। सरकार व सिंचाई विभाग की ओर से हाइड्रो पावर कंपनियों को आदेश जारी किए गए है कि वे पंजीकरण कराने के साथ ही जलकर जमा कराना भी शुरू करें।

योजना के शुरुआती चरण में ही बड़ी हाइड्रो पावर कंपनियों ने सरकार को झटका दे दिया है। टीएचडीसी ने जलकर देने से साफ तौर पर इंकार करते हुए जहां अदालत की शरण ली है, वहीं जेपी हाइड्रो पावर जैसी कंपनियों का कहना है कि सरकार व कंपनी के बीच हुए एमओयू में जलकर का कोई उल्लेख नहीं है ऐसे में जलकर देने का सवाल ही नहीं उठता।

वहीं उत्तराखंड जलविद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) जैसी कंपनियां जलकर देने को राजी है लेकिन इन कंपनियों का कहना है कि जलकर के ऐवज में जो खर्च आएगा, उसकी प्रतिपूर्ति बिजली दरों से की जाएगी।

यानी यूजेवीएनएल की ओर से सरकार को दी जाने वाली बिजली मंहगी हो जाएगी, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। बहरहाल निजी व सरकारी क्षेत्र की हाइड्रो पावर कंपनियों के इस कदम से सरकार व सिंचाई विभाग के आला अफसर पशोपेश में पड़ गए हैं।