उत्तराखंड बीजेपी अब सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की योजना पर काम करेगी। रामनगर में हुई बीजेपी की मंथन बैठक में प्रदेश बीजेपी ने पदाधिकारियों व विधायकों को ‘हम सबके सब हमारे’ का मूल मंत्र दिया।

दो दिनों तक चले इस मंथन में उत्तराखंड में चुनावी स्ट्रेटजी को लेकर चर्चा हुई, तो वहीं संगठन की मजबूती पर भी मंथन हुआ। यहां तय हुआ कि संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए 31 मार्च को देहरादून में राष्ट्रीय परिषद बुलाई गई है, जिसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भी वक्त मांगा गया है।

इसके अलावा जिला स्तर के पदाधिकारियों की अलग से ट्रेनिंग होगी, जिसमें केन्द्र की उपलब्धियों के साथ ही राज्य सरकार की नाकामियों को जमीनी स्तर तक ले जाने की कोशिश की जाएगी।

रामनगर की दो दिनी बैठक में लम्बी खींचतान के बावजूद नेता प्रतिपक्ष के नाम पर चर्चा से ही पार्टी नेता किनारा करते रहे। दरअसल प्रदेश पदाधिकारियों के बाद बुलाई गई विधानमंडल दल की बैठक में नेता प्रतिपक्ष को लेकर विधायकों के उग्र विरोधी तेवर भांपते हुए पार्टी शीर्ष नेताओं ने इसपर चर्चा से किनारा करना ही मुनासिब समझा।

दरअसल विधानमंडल दल की बैठक में कुछ विधायकों ने नई टीम में जातीय, क्षेत्रीय समीकरणों को लेकर पार्टी नेताओं को खुलकर खरी खोटी सुनाई। अब पार्टी अला कमान की पसंद भले मदन कौशिक बन रहे हैं लेकिन कौशिक की राह उनके घर के विधायक रोक रहे हैं।

दूसरा जातीय समीकरण के आधार पर अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष दोनों ब्राहमण की बनाने पर ही विधायकों को आपत्ति है। पंजाबी चेहरे के रूप में हरबंस कपूर के नाम पर विधायक सहमत हो सकते हैं क्योंकि कपूर पार्टी के वरिष्ठ विधायक हैं लेकिन दौड़-धूप करना उनके बस की बात नहीं।

वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत और बिशन सिंह चुफाल भी आखिरी दम तक कतार में बने हुए हैं। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या नेता प्रतिपक्ष को लेकर पार्टी आला कमान विधायकों से अब चर्चा कर उनकी रायशुमारी को तरजीह देगा या फिर पर्ची निकाल प्रदेश नेताओं को नाम का ऐलान करने के लिए दे देगा।

ये ही नहीं, ये भी हो सकता है कि अगर सभी नामों पर विवाद रहा तो प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के पास ही ये जिम्मा फिलहाल रखा जाए क्योंकि अब विधानसभा सत्र में कोई बहुत ज्यादा बिजनेस के आने की उम्मीद भी नहीं है।

अब नजरें दिल्ली दरबार की ओर टिकी हैं कि दिल्ली दरबार में क्या निर्णय लिया जाता है। हो सकता है कि चुनावी टीम को लेकर भी कुछ नामों का ऐलान यहां पर हो जाए। दिल्ली में होने वाली इस बैठक में पांचों सांसद भी मौजूद रहेंगे।