पहले कभी नेपाल और भारत के बीचोंबीच बहने वाली महाकाली का प्रवाह अब भारतीय इलाके की तरफ अधिक हो गया है। नदी का रुख बदलने से नेपाल में नदी के किनारे चौड़े मैदान नजर आ रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार पिछले तीन साल में महाकाली ने नेपाल की तरफ करीब 200 मीटर मैदान तैयार करवा दिया है। जून 2013 में आई आपदा के बाद झूलाघाट में जो विचित्र स्थिति सामने आ रही है उसे लेकर स्थानीय लोग चिंतित हैं।

महाकाली के किनारे बसे कानड़ी, सीम एवं बलतड़ी गांवों के पास रेत और पत्थर के जो ढेर लगे रहते थे, वह अब नजर नहीं आते। नदी लगातार किनारों को काटती जा रही है और भारतीय इलाके में तटों को समेटती जा रही है। खनन के कारण भी नदी के रुख में परिवर्तन आया है।

अब तक इस गंभीर मसले की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया है। लोग चाहते हैं कि महाकाली को अपने परंपरागत रास्ते से बहने के लिए खनन का कारोबार बंद किया जाना चाहिए। साथ ही नदी के किनारे पक्के तटबंधों का निर्माण किया जाए। नेपाल की तरफ महाकाली से आपदा का खतरा लगातार कम होता जा रहा है।

एसडीएम अनुराग आर्य का कहना है कि कानड़ी, सीम और बलतड़ी गांवों में नदी के बदलते रुख का सर्वे कराने के लिए टीम भेजी जाएगी। टीम की रिपोर्ट को केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। केंद्र सरकार इस मसले पर जो भी कदम उठाएगी, उस पर तत्काल अमल किया जाएगा।

विधायक विशन सिंह चुफाल को पिछले दिनों क्षेत्र के लोगों ने नदी का रुख बदलने के कारण पैदा हो रही स्थितियों की जानकारी दी। विधायक का कहना है कि इस मामले को सरकार के सामने उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है।