नई दिल्ली।… जेएनयू विवाद अब बीजेपी और उसके वामपंथी विरोधियों के बीच विचारधारा की लड़ाई बन गया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने वामपंथी पार्टियों के समर्थन में उतरते हुए मोदी सरकार की तुलना हिटलर के शासनकाल से की।

भाकपा की छात्र शाखा एआईएसएफ के सदस्य और जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को दो खेमों में बांट दिया है। इस बीच, सरकार ने ऐलान किया है कि जेएनयू जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी को ‘देशद्रोही गतिविधियों का अड्डा’ नहीं बनने दिया जाएगा।

केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी ने राहुल पर हमला करते हुए कहा कि वह और ‘उनके साथी लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हाफिज सईद की जुबान में बोल रहे हैं, जिसने जेएनयू में हुए भारत विरोधी कार्यक्रम के समर्थन में ट्वीट किया था।’ संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू को हुई फांसी के विरोध में जेएनयू परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के सिलसिले में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कन्हैया की रिहाई के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने धमकी दी है कि यदि छात्र नेता को रिहा नहीं किया जाता है तो वह सोमवार से हड़ताल करेंगे।

वामपंथी नेताओं के समर्थन में उतरे राहुल गांधी ने जेएनयू परिसर जाकर छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘सबसे बड़े देशद्रोही ऐसे लोग हैं जो इस संस्थान में छात्रों की आवाज दबा रहे हैं।’ आरएसएस-बीजेपी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने राहुल गांधी को काले झंडे दिखाए और बार-बार उनके भाषण में बाधा डाली। इस दौरान राहुल गांधी ने कई बार हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी का जिक्र किया और इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला।

राहुल ने कहा, ‘इस संस्थान की आवाज को दबाने वाले देशद्रोही हैं। वे नौजवानों की आवाज को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले मैं हैदराबाद में था और इन्हीं लोगों या इनके नेताओं ने कहा था कि रोहित वेमुला देशद्रोही था।’ कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, ‘जर्मनी में हिटलर नाम का एक शख्स था, जिसने लाखों लोगों की हत्या करा दी थी। यदि उस शख्स ने दूसरों की बात सुनी होती, तो हो सकता था कि वह देश इतने दर्द से न गुजरा होता।’ राहुल के इस बयान पर जेएनयू के वामपंथी छात्रों ने खूब तालियां बजाईं।

जेएनयू की घटना ‘चिंताजनक’
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की वर्तमान की घटनाएं ‘वास्तव में चिंताजनक’ हैं जिससे विश्वविद्यालय की बदनामी हो रही है और देश को पीड़ा पहुंच रही है।

नायडू ने कहा, ‘वर्तमान समय में हम परिसर में हंगामे की नई प्रवृत्ति देख रहे हैं जो नई हैं। जिन मुद्दों ने परिसरों में हंगामा उत्पन्न किया, ऐसा प्रतीत होता है ये व्यापक समाज की चिंताओं से अलग हैं।’ उन्होंने गजेंद्र चौहान की एफटीआईआई अध्यक्ष पद पर नियुक्ति, हैदराबाद में बीफ महोत्सव, कोलकाता में जादवपुर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच कभी न समाप्त होने वाले टकराव का उल्लेख किया और कहा कि छात्रों के विषयों का शायद ही कभी परिसर के बाहर कोई प्रभाव होता है।

उन्होंने कहा कि जेएनयू में जो हो रहा है वह वास्तव में परेशान करने वाला है। हो सकता है कि कुछ लोग यह करते हों, लेकिन इससे विश्वविद्यालय की बदनामी हो रही है और देश को पीड़ा पहुंच रही है।’ उन्होंने यह बात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेस (एनआईएमएचएनएस) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही।

छात्रों की आवाज दबा रही है सरकार
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जेएनयू के छात्र की गिरफ्तारी को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए राहुल गांधी ने परोक्ष रूप से हिटलर के शासन से उसकी तुलना की तथा राजग पर छात्रों की आवाज ‘दबाने’ का आरोप लगाया और छात्रों से ‘उनकी धौंस नहीं चलने देने के लिए कहा।’

देशद्रोह मामले में जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के एक दिन बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अजय माकन और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के साथ जेएनयू पहुंचे राहुल गांधी को बीजेपी की छात्र इकाई एबीवीपी के सदस्यों ने काले झंडे दिखाए।

इस पर उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों ने मुझे काले झंडे दिखाए, मुझे गर्व है इस देश पर कि उन्हें काले झंडे दिखाने का अधिकार है।’ सरकार पर हमला करते हुए राहुल ने कहा, ‘इस संस्थान की आवाज दबाने वाले लोग राष्ट्रविरोधी हैं। वे लोग युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले मैं हैदराबाद में था और इन्हीं लोगों ने या इन्हीं नेताओं ने कहा कि रोहित वेमुला राष्ट्रविरोधी थे।’ राहुल ने कहा कि आरएसएस और बीजेपी से बहस करके वे खुश होंगे। राहुल ने कहा, ‘असल में अगर वे हमें सुनेंगे तो हमें समझेंगे।’

छात्रों से कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, ‘वे नहीं समझेंगे कि आपका मुंह बंद कराकर वे आपको मजबूत बना रहे हैं। केवल यह संस्थान नहीं, और न केवल हम, न केवल यहां बैठे लोग बल्कि इस देश के एक अरब लोग आपमें भरोसा रखते हैं और आपके पक्ष में खड़े हैं।’

उन्होंने कहा, ‘इनकी धौंस कतई न चलने दें। जब वे खुद को देखेंगे, वो डर देखेंगे। वे भयभीत हैं। वे आतंकित हैं। वे गरीब, कमजोर भारतीय लोगों की आवाज सुनकर डरे हुए हैं। हर कदम पर उनके सामने सवाल है। उनसे केवल सवाल मत करें। अपने से भी सवाल करें।’ जेएनयू में छात्र के खिलाफ कार्रवाई और दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के लिए बने हालातों की तुलना करते हुए और पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, ‘केवल पीड़ा की बात कही गयी।’

उन्होंने कहा, ‘यह संस्थान उनकी आवाजों का प्रतिनिधित्व करता है। कुछ दिन पहले मैं हैदराबाद में था और उन्हीं लोगों ने कहा कि रोहित राष्ट्रविरोधी तत्व था। एक युवा ने खुद को अभिव्यक्त किया और देश की सरकार कहती है कि वह राष्ट्रविरोधी था। उसने क्या किया था? हर किसी ने कहा कि अपने भीतर का जो वह बयां करना चाहता था उसके लिए वह पीड़ा महसूस करते हैं।’

राहुल ने कहा, ‘बाद में एक मंत्री ने कहा कि वह दलित ही नहीं था। सुषमा स्वराज जी कोई नहीं पूछता कि वह दलित था या नहीं। सवाल है कि एक भारतीय छात्र को वह कहने क्यों नहीं दिया गया जो वह मानता था।’