नई दिल्ली।… दिल्ली की पटियाला हाऊस कोर्ट ने देशद्रोह के एक मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को शुक्रवार को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस बीच, पुलिस ने कहा कि कन्हैया और फरार चल रहे पांच अन्य आरोपियों के आतंकवादी संगठनों से कथित रिश्तों की जांच की जा रही है।

पुलिस ने दावा किया कि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी को याद करने के लिए नौ फरवरी को जेएनयू परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आरोपियों ने भारत-विरोधी नारे लगाए थे। पुलिस ने कहा कि अन्य आरोपियों की पहचान के लिए कन्हैया से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

पुलिस ने अदालत को बताया कि भारतीय सेना के खिलाफ और पाकिस्तान, अफजल गुरू और 1984 में हत्या के एक मामले में फांसी की सजा पा चुके मकबूल भट्ट के पक्ष में नारेबाजी की गई थी। सुनवाई के दौरान पुलिस ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट लवलीन के सामने एक कंप्यूटर पर वीडियो फुटेज चलाकर दिखाया। इस पर न्यायाधीश ने कन्हैया से सवाल किया कि ‘वे कौन सी आजादी मांग रहे थे?’

जज ने यह सवाल उस वक्त किया जब वीडियो फुटेज में कुछ लोगों को भारत से कश्मीर की आजादी की मांग की नारेबाजी करते देखा गया। इस पर कन्हैया ने कहा कि वह सभी को नहीं जानते, क्योंकि उनमें से कुछ जेएनयू के नहीं बल्कि बाहरी थे।

फुटेज देखते वक्त न्यायाधीश ने एक बार कहा, ‘ऐसा लगता है कि वे भारत में रहने की बात से दुखी हैं।’ सुनवाई के दौरान पुलिस ने दावा किया कि पांच अन्य आरोपी- ओमर खालिद, अनंत प्रकाश, रमा नागा, आशुतोष और अनिर्बान – जेएनयू परिसर से फरार हैं।

पुलिस ने कहा कि घटना के चश्मदीद गवाह संदीप कुमार जेएनयू में सुरक्षा गार्ड हैं और उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कन्हैया को भारत विरोधी नारेबाजी करते देखा है। अपनी पैरवी खुद ही करते हुए कन्हैया ने अदालत को बताया कि उन्होंने न तो कोई नारेबाजी की और न ही देश की अखंडता के खिलाफ कोई बात कही। उन्होंने कहा कि वह एबीवीपी कार्यकर्ताओं और कार्यक्रम के आयोजक छात्रों के बीच झड़प को रोकने के लिए मौके पर पहुंचे थे।

कन्हैया ने कहा, ‘मैं न तो कार्यक्रम का आयोजक था और न ही मैं वहां मौजूद था। मैं वहां इसलिए गया, क्योंकि मैं जेएनयू छात्रसंघ का अध्यक्ष हूं और वहां झड़प हुई थी। मीडिया मुझ पर मुकदमा चला रहा है। न्यायपालिका में मेरा पूरा यकीन है।’ सुनवाई के दौरान कन्हैया की आंखों में आंसू देखे गए।

उन्होंने अदालत में दावा किया कि यह राजनीति से प्रेरित मामला है और उन्हें पुलिस ने इसलिए फंसाया है क्योंकि उन्होंने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में एबीवीपी के उम्मीदवार को हराया था। कन्हैया ने अदालत में कहा, ‘मैं कार्यक्रम में लगाए गए नारों से खुद को अलग करता हूं। भारत के संविधान में मेरा पूरा यकीन है और मैंने हमेशा कहा है कि कश्मीर भारत का एक अखंड हिस्सा है।’

पुलिस ने अदालत से कन्हैया की पांच दिनों की पुलिस हिरासत मांगी, ताकि फरार चल रहे लोगों सहित सभी आरोपियों के आतंकवादी संगठनों से कथित संबंधों का पता लगाया जा सके। कन्हैया ने मजिस्ट्रेट को बताया कि वह उन छात्रों की पहचान करने में पुलिस की मदद करेंगे, जिन्हें वीडियो फुटेज में नारेबाजी करते देखा गया।

उन्होंने कहा कि जेएनयू के अधिकारियों ने कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं दी थी। लेकिन आयोजकों ने इसे एक ‘नुक्कड़ सभा’ में बदल दिया जहां उन्होंने भारत-विरोधी नारेबाजी की। शुरू में कन्हैया ने अदालत को बताया कि वह वीडियो फुटेज में नहीं थे। लेकिन पुलिस ने उनकी मौजूदगी का दावा किया। इस पर अदालत ने कहा, ‘वीडियो फुटेज कहां है? मुझे दिखाइए।’ इसके बाद अदालत में वीडियो फुटेज चलाकर दिखाया गया और न्यायाधीश ने वीडियो में कन्हैया को देखा।

बहरहाल, आरोपी ने सफाई दी कि वह फुटेज में उस वक्त दिखे हैं जब वह झड़प रोकने की कोशिश कर रहे थे। बीजेपी सांसद महेश गिरि और एबीवीपी की शिकायत पर वसंत कुंज थाने में गुरुवार को आईपीसी की धारा 124 ए (देशद्रोह) और 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया गया था। छात्रों के एक समूह ने मंगलवार को जेएनयू परिसर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था और 2013 में संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी पर लटकाने के खिलाफ नारेबाजी की थी।

एबीवीपी सदस्यों की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति रद्द करने के बावजूद इसे आयोजित किया गया। एबीवीपी ने इसे ‘राष्ट्रविरोधी’ कार्यक्रम करार दिया था।