नैनीताल जिले के रामनगर में चल रहे 23वें बसंतोत्सव के तीसरे दिन लोक गाथाओं और लोक नृत्यों पर आधारित प्रतियोगिताएं शुरू हुईं। इस प्रतियोगिता में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने अपने फन के जलवे बिखेरे।

इस दौरान यहां आई लोक कलाकार शिवांगी ने इस कार्यक्रम को प्रदेश की संस्कृति संरक्षण के लिए बहुत अहम बताया। उन्होंने कहा कि जहां इस प्रतियोगिता में आकर उन्हें बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है, वहीं उन्हें यहां आकर राज्य की विभिन्न संस्कृतियों को देखने और समझने का भी मौका मिलता है।

उन्होंने कहा कि राज्य में रामनगर एक ऐसा स्थल है जहां कुमाऊं, गढ़वाल, जौनसारी व्यास-चौदास, नीति मांणा की लोक गाथाओं और लोक संगीत के साथ लोकनृत्य देखने का मौका मिलता है। यहां लोक वाद्यों के साथ ही राज्य के विभिन्न वेशभूषा की जानकारी भी मिल जाती है।

प्रगतिशील सांस्कृतिक पर्वतीय समिति के सचिव गिरीश मठपाल बताते हैं कि वह 1993 से इस आयोजन को करते चले आ रहे हैं, लेकिन इस आयोजन में कोई भी सरकारी मदद उन्हें नहीं मिलती। यह पूरा कार्यक्रम जनता के सहयोग से आयोजित किया जाता रहा है।

इस बार इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के आने से समिति के सदस्यों में खासा उत्साह है। समिति के सदस्य दीप जोशी ने कहा कि सीएम हरीश रावत ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जो इस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंच रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम को राजकीय मेला घोषित करेंगे।

संग्रहालय में यूं तो आम पर्यटक नहीं पहुंचते हैं, लेकिन इतिहास के बारे में रूचि रखने वाले देशी-विदेशी पर्यटक यहां खूब आते हैं। स्थानीय छात्र भी म्यूजियम के संग्रह से खासे प्रभावित हुए हैं। छात्र गौरव गुप्ता का कहना है कि संग्रहालय अपने आप में अनोखा है और यहां का कलेक्शन आकर्षित करता है।