देहरादून।… भूकंप तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील उत्तराखंड में इनसे निपटने की अपनी तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को राज्य सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने राज्य के चार जिलों में भूकंप से संबंधित पूर्वाभ्यास (मॉकड्रिल) किया।

आईआरएस (इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम) पद्वति पर आयोजित किए गए इस मॉकड्रिल में चार जिलों, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली एवं उत्तरकाशी के अलावा जिला देहरादून को राज्य स्तर पर जिलों में सहायता देने के लिए सम्मिलित किया गया।

अस्थायी राजधानी देहरादून में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, एनडीएमए सदस्यों ने इस पूर्वाभ्यास को सफल बताते हुए कहा कि अभी तक इस प्रकार के पूर्वाभ्यास जिला स्तर पर ही किए जाते थे। राज्य स्तर पर चार जिलों में एक साथ ऐसा पूर्वाभ्यास पहली बार किया गया है, जिसे मॉडल के रूप में अन्य राज्यों के सामने रखा जाएगा।

इस मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबन्धन योजना की जानकारी रखना, योजना के अनुरूप कार्य करना एवं योजना में कमियों को चिन्हित कर भविष्य में उन्हें ठीक करने के साथ ही आपदा के दौरान समय पर रिस्पांस सुनिश्चित करना था।

मॉकड्रिल के दौरान देहरादून में भी चार जिलों के सहयोग के लिए यहां स्थित परेड ग्राउंड में स्टेजिंग एरिया बनाया गया जिसमें सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल, होमगार्डस, पुलिस, पी.ए.सी. तथा सिविल डिफेंस सहित सभी मुख्य नोडल विभागों एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने हिस्सा लिया।

मॉकड्रिल के बाद एनडीएमए और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के मध्य एक बैठक आयोजित कर उसकी समीक्षा की गई। राज्य सरकार को हर प्रकार के सहयोग का आश्वासन देते हुए एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल एन. सी. मारवाह ने कहा कि भूकंप जैसी स्थिति में संचार तंत्र, बिजली और अन्य अवस्थापना सुविधाओं के ध्वस्त होने की स्थिति में अन्य वैकल्पिक उपायों पर विचार करना होगा।

उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार से एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा। एनडीएमए के सदस्य मेजर जनरल वी. के. दत्ता ने गुरुवार के इस पूर्वाभ्यास कार्यक्रम को सफल बताते हुए कहा कि इसमें सभी अधिकारियों ने बेहतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में किया गया पूर्वाभ्यास अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में रखा जाएगा।

दत्ता ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने साल 2013 की आपदा के बाद काफी सुधार किया है और राज्य में आपदा से निपटने के लिए बेहतर तकनीक और तैयारियों का स्तर अन्य राज्यों से बेहतर है। सफल पूर्वाभ्यास के लिए उन्होंने राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की सराहना करते हुए कहा कि अभी तक इस प्रकार के पूर्वाभ्यास जिला स्तर पर ही किए जाते थे और राज्य स्तर पर चार जिलों में एक साथ ऐसा पूर्वाभ्यास पहली बार किया गया।

सचिव आपदा प्रबंधन अमित नेगी ने बताया कि साल 2013 की आपदा के बाद राज्य सरकार ने इस दिशा में काफी प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि केद्र से डॉप्लर रडार और सेटेलाइट फोन के लिए भी अनुमति मांगी गई है और अनुमति मिलते ही 26 सैटेलाइट फोन खरीदे जाएंगे। उन्होंने कहा कि वायरलैस तंत्र को भी और अधिक मजबूत किया जा रहा है।