उत्तराखंड के 4 जिलों में गुरुवार को भूकम्प आएगा और इस भूकम्प में बचाव व राहत कार्यों के लिए आर्मी से लेकर एसडीआरएफ और वॉलिंटियर्स भी भारी तादाद में मौके पर मौजूद रहेंगे।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इतने पहले कैसे पता चल गया कि भूकम्प आने वाला है, तो बता दें कि यह भूकम्प नकली होगा, जो कि एक मॉक एक्सरसाइज है। राज्य ने प्राकृतिक आपदाओं से कई बार बड़े नुकसान झेले हैं।

साल 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के निशान आजतक दिखाई देते हैं। राज्य में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बचाव व राहत कार्यों के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

इन्ही प्रशिक्षणों के मद्देनजर अब यह देखा जा रहा है कि आखिर प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने के लिए हम कितने तैयार हैं। इसे लेकर 11 फरवरी को चार जिलों में भूकंप की मॉक ड्रिल करने की तैयारी कर ली गई है।

राज्य के चार जिलों चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में गुरुवार को भूकम्प की सूचना देकर मॉक अभ्यास करते हुए बचाव राहत कार्य चलाए जाएंगे। यह सारा ऑपरेशन एनडीएमए की निगरानी में होगा।

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इसके लिए एनडीएमए के वरिष्ठ सलाहकार अवकाश प्राप्त मेजर जनरल वीके दत्ता अस्थायी राजधानी देहरादून पहुंच चुके हैं। उनके साथ कई अन्य अफसर भी देहरादून पहुंचे हैं। दत्ता ने आपदा प्रबन्धन विभाग और संबधित जिलों के प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठक भी की।

आपदा के दौरान बचाव राहत कार्यों के अभ्यास के लिए बकायदा इंसिडेंट कमांडर बनाए गए हैं। बेहतर समन्वय के लिए चारों जिलों में आपातकालीन परिचालन केंद्रों को सक्रिय किए जाने, रिसोर्स मोबिलाइजेशन, स्टेजिंग एरिया की व्यवस्था और प्रभावित क्षेत्रों में होने वाली तैयारियों पर मंथन किया जा रहा है।

भूकम्प अभ्यास से पहले बुधवार को टेबल टॉप अभ्यास किया गया, जिसमें विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चारों संबधित जिलों के डीएम भी जुड़े और एनडीएमए सहित आपदा प्रबन्धन विभाग के वरिष्ठ अफसरो ने भी चर्चा की।

भूकम्प के मॉक अभ्यास के दौरान आर्मी, एसडीआरएफ, जिला आपदा प्रबन्धन केंद्रों सहित स्वयं सेवकों और अन्य संगठनों को भी शामिल किया जाएगा। कोशिश होगी कि किसी भी आपदा में बचाव और राहत कार्यों की अपनी तैयारियों को परखा जा सके।