देहरादून।… उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार पर केंद्र द्वारा संचालित परियोजनाओं में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने सोमवार को कहा कि राज्य में 77. 2 किलोमीटर लंबी चार लेन की काशीपुर-सितारगंज राजमार्ग परियोजना के लिए अनुबंधित कंपनी का उत्पीड़न किया जा रहा है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए।

उत्तराखंड बीजेपी के प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने संवाददाताओं से कहा, ‘बीजेपी काशीपुर-सितारगंज हाईवे प्रोजेक्ट के प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच की मांग करती है, ताकि राज्य में सरकारी एक्सटॉर्सन के इस उदाहरण में संलिप्त सभी लोगों का पर्दाफाश हो सके। इस मामले में बड़े नौकरशाहों व उच्च पदों पर आसीन राजनेताओं की भूमिका होने का भी आरोप लगाया।’

राज्य सरकार द्वारा केन्द्र द्वारा संचालित परियोजनाओं में असहयोग एवं बाधा उत्पन्न करने की वजह बताते हुए चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत को लगता है कि यदि इन योजनाओं का राज्य में प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो उससे बीजेपी को चुनावी लाभ होगा और उनके इस झूठ का भी पर्दाफाश हो जाएगा कि केन्द्र उत्तराखंड के विकास में सहयोग नहीं कर रहा है।

काशीपुर-सितारगंज चार लेन राजमार्ग परियोजना का उदाहरण देते हुए चौहान ने आरोप लगाया कि इस परियोजना के लिए अनुबंधित काशीपुर-सितारगंज हाईवे प्रा.लि. कंपनी को राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है और इसके विपरीत उसका निरंतर उत्पीड़न कर रही है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना को इस साल अगस्त तक पूरा होना है, लेकिन इसके लिए अभी तक केवल 54 प्रतिशत भूमि ही अर्जित की गई है, जबकि जबकि केन्द्र भूमि के प्रतिकर की सम्पूर्ण धनराशि राज्य सरकार को अग्रिम राशि के रूप में उपलब्ध करा चुकी है और मुआवजा हेतु प्राप्त लगभग 40 करोड़ रुपये का अभी तक वितरण नहीं हुआ है।

चौहान ने आरोप लगाया कि भूमि अर्जन की कार्रवाई को जानबूझकर धीमा करने के लिए राज्य सरकार ने पिछले 22 माह में आठ भूमि संबंधी अधिकारियों का ट्रांस्फर कर दिया। राज्य सरकार पर कंपनी के उत्पीडन का आरोप लगाते हुए बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि उसने कंपनी पर अनुचित दबाव डालकर खनन पट्टा लेने के लिए प्रार्थनापत्र लिखवाया और फिर स्वीकृति हासिल कर उसे अवैधानिक तरीके से किसी और को दे दिया।

चौहान ने कहा कि जब कंपनी के अधिकारियों ने उधमसिंह नगर जिला प्रशासन के इसी प्रकार के अन्य अनुचित दबाव के आगे झुकने से इंकार कर दिया तो जिलाधिकारी ने कंपनी के कैंप को सील करवा दिया, उसके प्लान्ट और मशीनरी पर ताला जड़ दिया तथा गाड़ियां सीज कर दीं।

हालांकि, बाद में कोई मामला न बनने पर उन सभी को बिना जुर्माने के छोड़ भी दिया गया, जिससे यह प्रमाणित हो गया कि सभी मामले झूठे थे और उत्पीड़न की नीयत से दर्ज कराए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।

बीजेपी नेता ने कहा कि उपरोक्त कम्पनी का उदाहरण यह बताने के लिए पर्याप्त है कि सरकार में बैठे हुए लोगों द्वारा लूट-खसोट की जा रही है और उद्योगों का उत्पीड़न किया जा रहा है।