एक ओर देशभर में बाघ व गुलदार जैसे जंगली जानवरों को बचाने की मुहिम चल रही है और दूसरी और उत्तराखंड के पहाड़ों में मौत का पर्याय बन गए हैं। पौड़ी के कफोलस्यूं पट्टी के सरक्याणा वल्ला गांव में सात वर्षीय बच्चे को आदमखोर गुलदार ने मार डाला।

बच्चा अपनी मां के साथ घर से सौ मीटर दूर गाय लेने के लिए गया था। घटना के 15 घंटे के बाद बच्चे का अधखाया शव गांव से दो सौ मीटर दूर झाड़ियों में मिला। गांव में शिकारी दल तैनात करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शव नहीं उठाने दिया।

कल्जीखाल ब्लॉक के सरक्याणा वल्ला गांव निवासी नरेंद्र रावत का सात वर्षीय बेटा सुमित अपनी मां के साथ बुधवार शाम करीब पांच बजे घर से करीब सौ मीटर दूर बंजर खेतों में गाय लेने गया था। बाद में मां लक्ष्मी देवी ने उसे घर भेज दिया। शाम को करीब साढे़ छह बजे जब लक्ष्मी घर आई तो पता चला सुमित घर पहुंचा ही नहीं।

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खबर मिलने पर ग्रामीणों ने सुमित को तलाशना शुरू किया। वन और राजस्व विभाग के कर्मचारी भी मौके पर पहुंच गए। रात में सुमित की चप्पल और पैजामा तो रास्ते से कुछ दूर पड़े मिले, लेकिन उसका पता नहीं चल पाया। काफी तलाशने के बाद गुरुवार सुबह साढे़ आठ बजे सुमित का अधखाया शव घर से करीब दो सौ मीटर नीचे झाड़ियों में मिला।

गुलदार ने शव के निचले हिस्से को पूरी तरह खाया हुआ था। शव मिलने के काफी देर बाद भी प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। बाद में पहुंचे तहसीलदार आशीष घिल्डियाल और रेंजर के.सी. थपलियाल को भी लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा।

सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत मोहन बिष्ट, ग्राम प्रधान सुनीता देवी, चंद्रमोहन सिंह, दिनेश सिंह ने डीएफओ को बुलाने की मांग की। करीब 12 बजे डीएफओ रमेश चंद्र और एसडीओ सुबोध काला के पहुंचने के बाद भी लोग नहीं माने।

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उनका कहना था कि गुलदार को आदमखोर घोषित किए जाने और गांव में शिकारी दल तैनात होने के बाद ही वह शव को उठाने देंगे। डीएफओ रमेश चंद्र ने बताया कि गुलदार आदमखोर घोषित हो गया है। शिकारी जॉय हुकिल को मौके पर भेजा जा रहा है।

राजस्व विभाग के अधिकारियों ने पीड़ित परिवार के घर सांत्वना दी। पीड़ित परिवार को मुआवजे की पहली किश्त के रूप में नब्बे हजार का चेक दिया गया। ग्रामीणों ने गुलदार के हाथों जान गंवा चुके बच्चे के पिता को सरकारी नौकरी देने की भी मांग उठाई।

उन्होंने कहा कि मृतक का पिता नरेंद्र रावत मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहा है। इस घटना ने उसे बुरी तरह झकझोर दिया है। आर्थिक हालत खराब होने के बाद भी उसका बीपीएल कार्ड तक नहीं बना है।

गुलदार के हमले में जान गंवा चुका सुमित तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। ग्रामीणों के अनुसार सुमित प्राथमिक विद्यालय ध्यूली बिष्ट में कक्षा एक में पढ़ता था। उसका भाई समीर करीब पांच साल और बहन सोमन तीन साल की हैं।