ऑस्ट्रेलियाई मशीनें बनाएंगी कैलाश-मानसरोवर मार्ग, चारों धामों को जोड़ने के लिए बनेगी सड़क

केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सडक दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए आने वाले समय में 11 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने बताया, उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर तक आसानी से पहुंचने के लिए ऑस्ट्रेलिया से मशीनें मंगाई गई हैं। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को जोड़ने के लिए 11 हजार 700 करोड रुपये के निवेश से 900 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा और इसे 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा।

गडकरी ने मंगलवार को जयपुर में अखिल भारतीय क्षेत्रीय संपादक सम्मेलन के दूसरे दिन सम्बोधित करते हुए कहा कि देश का मात्र दो प्रतिशत यातायात राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलता है। दुर्घटना संभावित 726 स्थानों को चिन्हित कर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 11 हजार करोड रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे दुर्घटनाओं में करीब पचास फीसदी की कमी आएगी। उन्होंने कहा कि हर साल करीब पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं, इनमें डेढ लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है और करीबन तीन लाख लोग घायल होते है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग को 97 हजार किलोमीटर से एक लाख 52 हजार किलोमीटर राष्ट्रीय महामार्ग बनाने का निर्णय लिया है। गडकरी ने कहा कि मार्च अंत तक राष्ट्रीय राजमार्ग को 18 किलोमीटर प्रतिदिन से 30 किलोमीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। हमारा लक्ष्य देश में 100 किलोमीटर प्रतिदिन का है।

गडकरी ने कहा कि लागत को कम करके गुणवत्ता बढ़ाने के लए सीमेंट की सडकों का निर्माण किया जाएगा। सीमेंट सड़क को 25-30 सालों तक रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। सीमेंट की सडक बनाने के लिए तीन साल के लिए 95 लाख टन सीमेंट के आदेश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि तारकोल की सड़कों के निर्माण में 7-8 प्रतिशत प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया जाएगा।

दिल्ली-मेरठ को जोड़ने के लिए नए राजमार्ग के निर्माण में सौलिड वेस्ट काम में लिया जाएगा। पर्यावरण की समस्या से निजात पाने के लिए गडकरी ने इथेनोल, बायो-डीजल, बायो सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अप्रैल 2020 तक देश में बीएस-6 इमिशन नियम लागू हो जाएंगे।

गडकरी ने कहा कि बंदरगाहों के विकास के लिए सागरमाला कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसके तहत सरकार देश में स्मार्ट बदंरगाहों का निर्माण करने की योजना बना रही है, जिसमें गंदे पानी को पुन: काम में लिया जाएगा। इन स्थानों पर आधुनिक अस्पताल, इंजीनिंयरिग कॉलेज, आईटीआई भी खोले जाएंगे। मछुआरों के समुहों को फिशिंग ट्रावलर्स खरीदने के लिए रियायत दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि जल मार्ग विकास के लिए राष्ट्रीय वाटर वेज के लिए गंगा नदी के टर्मिनलों का वाराणसी, साहिबगंज (झारखंड) और हल्दिया को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में हल्दिया और फरक्का का उद्घाटन किया जा चुका है, जबकि दूसरे चरण में फरक्का और पटना, तीसरे चरण में पटना और वाराणसी को कवर किया जाएगा।