देहरादून ‘स्मार्ट सिटी’ के लिए फिर से प्रस्ताव भेजेगी उत्तराखंड सरकार

‘स्मार्ट सिटी’ के लिए पहले दौर में अस्थायी राजधानी देहरादून का चयन न हो पाने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तय किया है कि ग्रीन फील्ड ‘नई परियोजना’ के आधार पर एक बार फिर से देहरादून का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा। यदि इस बार भी इसे मंजूरी न मिली तो रेट्रोफिटिंग ‘पुराने ढांचे में सुधार’ के विकल्प पर विचार किया जाएगा।

केंद्र द्वारा ‘स्मार्ट सिटी’ के लिए घोषित 20 शहरों की पहली सूची में देहरादून को जगह नहीं मिली है। इसके कारणों और इस विषय में आगामी रणनीति तय करने को लेकर देहरादून में रविवार शाम मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें तय किया गया अगले चरण में ग्रीन फील्ड के आधार पर देहरादून के चयन के लिए पुन: केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाए।

देहरादून में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार आगे भी ग्रीन फील्ड पर आधारित प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाएगी तो देहरादून के लिए रेट्रोफिटिंग के विकल्प पर विचार किया जाएगा और इसके लिए नगर निगम सहित सभी स्टोक होल्डर्स से बात की जाएगी।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री रावत ने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए प्रस्ताव तीन आधार पर तैयार किया जा सकता था- पहला रिडेवलपमेंट (पुनर्विकास), जिसमें आवश्यकतानुसार पुराने निर्माण कार्यों को ध्वस्त करके नया निर्माण किया जाता, लेकिन इसके लिए आवश्यक शर्त यह थी कि इसमें शत प्रतिशत प्रभावित लोगों से लिखित में सहमति लेनी होती जो देहरादून में सम्भव नहीं लग रहा था।

उन्होंने कहा कि दूसरा विकल्प रेट्रोफिटिंग का था, जिसमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज सिस्टम व लोकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को लिया जाना था। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में विभिन्न योजनाओं के तहत पेयजल, सीवरेज व ड्रेनेज का काम पहले से ही चल रहा है और लोकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम में मेट्रो तभी लाभदायक होती जब इसमें निकटवर्ती हरिद्वार व ऋषिकेश को भी देहरादून से जोड़ा जाता।

मुख्यमंत्री ने इस संबंध में साफ किया कि सभी विकल्पों पर विचार के बाद ग्रीनफील्ड विकल्प को अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए चयनित 20 शहरों में किसी का भी प्रस्ताव ग्रीनफील्ड पर आधारित नहीं था और अन्य राज्यों के साथ ही उत्तराखंड के संबंधित अधिकारियों को भी अगले चरण के लिए वार्ता हेतु बुलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार से यह जानकारी ली जाएगी कि देहरादून के प्रस्ताव में क्या कमियां रह गई थीं और यह भी देखा जाएगा कि इन कमियों को कितना दुरुस्त किया जा सकता है। गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने अस्थायी राजधानी देहरादून में स्मार्ट सिटी विकसित करने के लिए हरबंसवाला स्थित चाय बागान की 350 एकड़ जमीन चिन्हित करते हुए उसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है।

हांलांकि, सरकार के इस प्रस्ताव का चाय बागान में कार्यरत श्रमिकों, स्थानीय ग्रामीणों, बीजेपी और AAP जैसे राजनीतिक दलों के अलावा पर्यावरणविद् भी विरोध कर रहे हैं।