साल 2013 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड सरकार ने आपदा प्रभावितों की मदद के लाख दावे किए हैं, लेकिन आज भी कई ऐसे आपदा प्रभावित इलाके हैं, जिन्हें सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते आपदा के ढाई साल बाद भी राहत के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिल पाया है।

जून 2013 में आई आपदा के समय उत्तराखंड की अन्य नदियों की ही तरह पिंडर नदी ने भी अपना रौद्र रूप दिखाया था, जिसकी चपेट में आने से न सिर्फ कई लोग बेघर हो गए थे, बल्कि उनके रोजगार के साधन भी समाप्त हो गए थे।

आपदा का दंश झेल रहे इन लोगों को राज्य सरकार द्वारा मदद का भरोसा दिया गया, लेकिन सरकारी तंत्र के सौतेले व्यवहार के चलते आपदा के ढाई साल बाद भी थराली और नारायणबगड़ में आज भी 150 से ज्यादा दुकानदार ऐसे हैं, जिन्हें आपदा के नाम पर एक फूटी कौड़ी नसीब नहीं हुई है। व्यापारी प्रेम सिंह, राकेश सिंह, मुकेश भारद्वाज, ललिता फरस्वाण आदि का कहना है कि उन्हें आज तक आपदा राहत राशि नहीं मिल पाई है।

इस मामले में जहां तहसील प्रशासन मौन है। वहीं, स्थानीय विधायक और संसदीय सचिव प्रोफेसर जीतराम इस बात को स्वीकार करते हैं और अब इन लोगों को राहत दिलाने की बात कह रहे हैं। उधर बीजेपी नेता राकेश जोशी इसके लिए सरकार को जिम्मेदार बता रहे हैं।

ये सच है कि राज्य सरकार द्वारा आपदा प्रभावितों की मदद के लिए भरसक कोशिश की गई, लेकिन प्रशासनिक तंत्र की खामियों के चलते ये भी असल हकदारों को कम ही मिल पाई है। वरना आज केदार घाटी की तरह ये स्थिति नहीं होती कि किसी को एक बार भी मुआवजा न मिला और किसी को दो बार से अधिक।