उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वन विभाग के कारण सड़क से अब तक दूर रह रहे गांवों के ग्रामीणों के लिए खुशखबरी है। मार्च 2016 के अंत तक वन विभाग 500 सड़कों को क्लीरियेंस देने जा रहा है।

ऐसे में सालों से वन विभाग की आपत्ति के कारण सड़क मार्ग का अपने गांव तक पहुंचने का सपना संजोए सैकड़ों गांव के ग्रामीण भी सड़क मार्ग से जुड़ पाएंगे।

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क मार्गों पर वन क्षेत्र पड़ने से वर्षों से सैकड़ों सड़कें रुकी हुई हैं, जिसके कारण 21वीं सदी में भी कई गांवों में आज तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों को आज भी कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर सड़क मार्गों तक पहुंचना पड़ता है, लेकिन अब केंद्र सरकार के साथ ही वन मंत्रालय अपने नियमों में काफी शिथलता ला चुका है।

सालों से अपनी ग्राम पंचायत में मूलगढ़-गण्ठराखाल-श्रीनगर सड़क पहुचने का सपना देख रहे ग्रामीण पुरुषोतम सिंह का कहना है कि अबकी बार उन्हें उम्मीद है कि वन विभाग उनके गांव तक पहुंचने वाली सड़क को अपनी मंजूरी दे देगा।

उत्तराखंड के वन मंत्री दिनेश अग्रवाल का कहना है कि अब सड़कों के लिए वन विभाग की आपत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तो 5 हेक्टेयर तक अनापत्ति सीधे राज्य सरकार द्वारा दी जा सकती है।

600 सड़कों को अब तक मंजूरी दी जा चुकी है और मार्च तक 500 अन्य सड़कों पर वन विभाग अपनी अनापत्ति देने वाला है। बता दें कि हाल के वर्षों में वन विभाग जिस तरह से अपने नियमों में शिथलता लाया है। उससे सैकड़ों सड़क विहीन गांवों के लोगों को आशा की किरण नजर आने लगी है।