नई दिल्ली।… दो साल पहले आसमानी आफत के कारण तबाह हुए केदारनाथ शहर के पुनर्निर्माण का काम अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और इसी दौरान उत्तराखंड सरकार एवं अन्य एजेंसियां भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए कई कदम उठा रही हैं।

इन उपायों के तहत, आपातकाल के दौरान बचाव अभियानों में इस्तेमाल किए जाने के लिए छह हैलीपैड बनाए गए हैं, तीर्थयात्रियों और घोड़ों-खच्चरों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। चौड़ी सड़कें बिछाई गई हैं, मौसम की भविष्यवाणी दिन में तीन बार की जाने लगी है और मंदिर को पानी एवं शिलाखंडों से बचाने के लिए उसके चारों ओर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

उत्तराखंड के प्रमुख सचिव राकेश शर्मा ने कहा, ‘हमने इस बात पर विचार किया कि यदि ऐसी आपदा भविष्य में दोबारा आती है तो हम इस तीर्थस्थल को कैसे बचा सकते हैं? सुरक्षा मूलत: दो चीजों से की जानी है- पानी से और शिलाखंडों से। इसलिए तीन स्तरीय सुरक्षा योजना बनाई गई। हम चोराबाड़ी झील के पास इस इलाके के चारों ओर दीवार (गेबियन वॉल) बनाएंगे। तबाही यहीं से शुरू हुई थी। यह दीवार शिलाखंडों को नीचे गिरने से रोकेगी।’

केदारनाथ में पुनर्विकास का काम समाप्ति की ओर
इस बीच केदारनाथ एवं अन्य तीर्थस्थानों पर पुनर्विकास का कार्य अब समाप्ति की ओर है और राज्य सरकार को इस साल बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने शनिवार को बताया कि केंद्र सरकार उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है विशेष तौर पर केदारनाथ में। राज्य प्रशासन इस ऐतिहासिक स्थान पर पुनर्विकास कार्य खत्म कर चुका है।

केदारनाथ के पुनर्विकास पर एक वृत्तचित्र और एक पत्रिका ‘हिल मेल’ का विमोचन करते हुए शर्मा ने कहा, ‘इस ऐतिहासिक मंदिर का वैभव वापस लाने के लिए हम उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।’ उत्तराखंड पुनर्विकास कार्य के अंतिम चरण में है। राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि इस साल वह रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद कर रहे हैं।

सोनप्रयाग से केदारनाथ के बीच में छह हैलीपैड तैयार किए गए हैं, ताकि भविष्य में आपदा के दौरान बचाव अभियान चलाने में आसानी हो। पर्यटकों के लिए सोनप्रयाग में 300 कारों की पार्किंग तैयार की गई है। मुख्यमंत्री का जोर केदारनाथ में आपदा आने के बाद से क्षेत्र में रोजगार पैदा करने को लेकर है, जिसके लिए सरकार ने एक समग्र योजना बनाई है।