उत्तराखंड का एक गांव ऐसा भी है, जहां बच्चा पैदा होने की किलकारी आज तक नहीं सुनी गई है। आजादी का जश्न मनाते हुए 68 साल का समय गुजर गया है और अब तो राज्य गठन को भी 15 साल हो गए हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की किरण क्यों नहीं पहुंची, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। साथ ही उन जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह एक तमाचा ही है जो सालों से वोट की राजनीति कर जनता को बेवकूफ बनाते आ रहे हैं।

रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ विकासखंड के सीमांत गांव गौंडार में आज तक बच्चों की किलकारी ग्रामीणों ने नहीं सुनी है। कारण यह कि गांव में न कोई स्वास्थ्य की सुविधा है और न ही सड़क। ऐसे में ग्रामीण जनता को भारी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।

ग्रामीण महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान गौंडार गांव से दूर मायके या फिर ससुराल भेज दिया जाता है। गांव में स्वास्थ्य और सड़क की सुविधा न होने से ग्रामीणों ने आज तक किसी बच्चे की पहली किलकारी नहीं सुनी है।

जिलाधिकारी डॉ. राघव लंगर की मानें तो गौंडार गांव के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। उरेड़ा की मदद से गांव में बिजली पहुंचा दी गई है और अब ग्रामीणों को सड़क का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा संचार और स्वास्थ्य सुविधा से भी गांव को जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे।