भले ही उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून को ‘स्मार्ट सिटी’ की पहली लिस्ट में शामिल न किया गया हो, लेकिन दून को साफ सुथरा और बेहतर सुविधाओं वाला शहर बनाने की कवायद शुरू की जा रही है।

इसके लिए नगर निगम इस साल करीब 40 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसमें सबसे अहम हाउस फॉर ऑल योजना है। केंद्र की इस योजना का लाभ खासकर गरीब तबके के लोगों को मिलेगा।

इसके अलावा घंटाघर का रेनोवेशन और गांधी पार्क का नया रूप भी इसी साल लोगों के सामने होगा, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मेयर ने बताया दून को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास शुरू किए जा रहे हैं।

अस्थायी राजधानी देहरादून ‘स्मार्ट सिटी’ की पहली सूची में शामिल नहीं हुई है। इस पर राज्य में राजनीति शुरू हो गई है। पहले बयानबाजी का दौर शुरू हुआ और अब सड़कों पर पुतला दहन भी आम बात होने लगी है।

दून को ‘स्मार्ट सिटी’ में शामिल न किए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस केंद्र और बीजेपी के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस का मानना है कि इसके पीछे राज्य के पांचों सांसद और केंद्र सरकार जिम्मेदार है। राज्य की कांग्रेस सरकार ने तो सही प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन केंद्र ने देहरादून को पहली सूची में शामिल नहीं किया।