देवभूमि के सच्चे सपूत शहीद मोहन नाथ गोस्वामी को उनके अदम्य साहस और पराक्रम के लिए गणतंत्र दिवस के मौके पर मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। गोस्वामी को मिले अशोक चक्र से उत्तराखंड का नाम एक बार फिर से देश के मानचित्र पर दमक रहा है।

नैनीताल जिले में हल्द्वानी के पास लालकुआं के बिन्दुखत्ता में रहने वाले इस शहीद को मिले इस सम्मान से जहां पूरे इलाके उत्तराखंड खुश है। वहीं उनकी मां अपने सुपुत्र को खोकर भी गौरवान्वित महसूस तो कर रही है, लेकिन इस सम्मान समारोह में शामिल न होने का दर्द और उनकी आंखो में साफ झलक रहा है।

नैनीताल जिले के लालकुंआ बिन्दुखत्ता में जन्मे मोहन नाथ गोस्वामी फौजी परिवार से होने के कारण देशभक्ति के जज्बे से बचपन से वाकिफ थे। अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उन्होंने सितंबर 2015 में कुपवाड़ा सेक्टर में अदम्य साहस का परिचय दिया और अकेले ही 11 आंतकियो को ढेर कर दिया।

इसी मुठभेड़ में शहीद हुए मोहन नाथ गोस्वामी को इस पराक्रम के लिए 67वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनकी पत्नी भावना गोस्वामी को अशोक चक्र देकर सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह की जानकारी उनकी मां राधिका देवी को न होने का मलाल है। साथ ही बेटे को मिले इतने बड़े सम्मान से उन्हें दूर कैसे रखा गया है, यह दर्द और पीड़ा उनकी आंखों में साफ है।

उनका कहना है कि इससे बड़ा सम्मान किसी मां के लिए क्या हो सकता है कि पूरा देश उसको नमन कर रहा है, लेकिन इस सम्मान की मुझे जानकारी दी जाती तो निश्चित तौर पर बेटे के बलिदान पर और अधिक फख्र होता।

राज्य सरकार ने उनके प्रति श्रद्धाजंलि व्यक्त करते हुए उनके नाम से रोड, मिनी स्टेडियम, स्कूल बनाने सहित शहीद द्वार बनाने की घोषणा की थी। चार महीने पहले मोहन के घर पर आए मुख्यमंत्री हरीश रावत की इस घोषणा को भी अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है।

बावजूद इसके शहीद मोहन के भाई शंभू नाथ गोस्वामी, भाभी चंपा गोस्वामी अपने आप को गौरान्वित महसूस कर रहे हैं। जबकि शहीद मोहन का भतीजा सौरभ भी अपने चाचा की तरह देश की सेवा करना चाहता हैं। वह सेना में जाकर अपने खानदान का रोशन करना चाहता है।

मोहन को अशोक चक्र मिलने की खबर से लालकुआं बिन्दुखत्ता में रहने वाला हर जाति-वर्ग, सम्प्रदाय, राजनैतिक दल, व्यापार मंडल सहित हर कोई गर्व महसूस कर रहा है। जनप्रतिनिधि बीना जोशी, नगर पंचायत लालकुआं रामबाबू मिश्र सहित उनके पड़ोसी चंपा और शेखर आदि सभी का कहना है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शहादत के समय शहीद द्वार, स्टेडियम, सड़क और एक स्कूल खोलने की घोषणा की थी।

अब सरकार जल्द से जल्द इन घोषणाओं को पूरा कर दे, तो निश्चित तौर पर सरकार की तरफ से यह शहीद मोहन को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।