फाइल चित्र - बाबा रामदेव

बाबा रामदेव ने देश में स्वदेशी की मुहिम को एक अलग पहचान दी है और पतंजलि के तहत तमाम तरह के उत्पाद पेश किए हैं। अब बाबा रामदेव और उनकी पतंजलि योगपीठ ने पूरे देश में भारतीय पद्धति की शिक्षण संस्था आचार्यकुलम खोलने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है।

हरियाणा के बाद छत्तीसगढ़ और सिक्किम में आचार्यकुलम खुलेंगे। सभी राज्यों में एक-एक आचार्यकुलम खोलने के बाद राज्यों के अलग-अलग जिलों में भी यह शिक्षण संस्थाएं खोली जाएंगी।

पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने पत्रकारों को बताया कि भारतीय पद्धति की शिक्षा से जुड़ा एक केंद्रीय बोर्ड बनाने की योजना भी आगे बढ़ गई है। उन्होंने कहा, इसकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। देश में ऐसे अनेक प्रतिष्ठान हैं जो भारतीय और आधुनिक शिक्षण प्रणाली को मिलाकर शिक्षा दे रहे हैं।

इन शिक्षण संस्थानों में देश के कई गुरुकुल भी शामिल हैं। यहां प्राच्य और नवीन को मिलाकर आधुनिक के साथ प्राचीन मूल्य भी छात्रों को सिखाए जाते हैं, लेकिन प्राचीन मूल्यों की परीक्षा कहीं नहीं होती।

देश में जितने भी बोर्ड हैं वे प्राचीन विधाओं की परीक्षा नहीं लेते। परिणाम स्वरूप तीरंदाजी, संस्कृत, शारीरिक सौष्ठव, योग आदि की परीक्षाएं भी जरूरी हैं। इसीलिए नए बोर्ड का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा भारत को यदि विश्व गुरु बनना है तो ऋषि मुनियों द्वारा दिए गए ज्ञान को सम्मान देना होगा। आचार्यकुलम की स्थापना प्राचीन और नवीन का मिश्रण कर की गई है। ऐसे संस्थानों के लिए सीबीएसई की तरह केंद्र स्तर पर जल्द नया बोर्ड गठित हो जाएगा।