बागेश्वर : जिस पेयजल फिल्टर से बुझती है 101 गांवों की प्यास, उसी में मरे मिले 22 बंदर

बागेश्वर जिले के विचला दानपुर क्षेत्र में लीती-रिठकुला पेयजल योजना के स्नो सैंड फिल्टर में 22 बंदर मरे मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। इस पेयजल फिल्टर से क्षेत्र के करीब 101 गांवों को पेयजल की आपूर्ति होती है।

सवाल यह है कि एक साथ इतने बंदर फिल्टर में कैसे मर गए? कहीं बंदरों को मारने के लिए किसी ने पानी में कुछ मिला तो नहीं दिया था। इसके साथ ही बंदरों के टैंक में मरे मिलने से पानी के दूषित होने की आशंका भी है। वजह क्या है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इस घटना से क्षेत्र के लोग सकते में हैं।

जानकारी के अनुसार पेयजल संस्थान की लीती-रिठकुला पेयजल योजना का स्नो सैंड फिल्टर लीती के जंगल में बना है। फिल्टर चारों ओर से खुला है। उसकी बेरीकेडिंग भी नहीं की गई है। बांज के जंगल के बीच और ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने के कारण वहां तापमान भी काफी कम रहता है।

फिल्टर में बंदर कब और कैसे मरे इसकी सही-सही जानकारी किसी को भी नहीं है। पूर्व बीडीसी सदस्य और कांग्रेस नेता नरेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि लीती के कुशल सिंह, मोहन सिंह और प्रमोद सिंह गायों को चराने के लिए जंगल गए थे।

उन्होंने फिल्टर में बंदरों को मरा देखा। उनकी संख्या 22 थी। ग्रामीणों की सहायता से बंदरों को फिल्टर से बाहर निकाला गया। फिल्टर की लंबे समय से सफाई भी नहीं हुई है।

पेयजल संस्थान के एग्जक्यूटिव इंजीनियर जेएस खाती ने बताया कि संबंधित जेई ने मौके पर जाकर फिल्टर की सफाई करा दी है। जेई को वहां बंदर मरे हुए नहीं दिखे। उन्होंने बताया कि स्नो सैंड फिल्टर पहले से ही खुले में ही बना है।

तहसीलदार एमएस बिरोड़िया ने बताया कि उन्हें फिल्टर में बंदरों के मरने की अभी तक कोई सूचना नहीं है। नायब तहसीदार और क्षेत्रीय राजस्व उप निरीक्षक को मौके पर भेजकर मामले को दिखवाया जाएगा। वहीं घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन की लापरवाही को लेकर काफी रोष है।