उत्तराखंड की लोककला रम्माण की झांकी इस बार 26 जनवरी को राजपथ पर भी दिखाई देगी। सीमांत विकासखंड जोशीमठ के सलूड डुंग्रा गांव की ‘रम्माण’ इस बार चौपाल के बजाए दिल्ली के राजपथ पर दिखाई देगी।

इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ में आयोजित होने वाली झांकियों में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व ‘रम्माण’ के जरिए होगा। ‘रम्माण’ में कलाकार चेहरे पर 18 प्रकार के मुखौटे और 12 ढोल दमाउं और अट्ठारह तालों के साथ एक खास किस्म का नृत्य करते हैं।

‘रम्माण’ के नाम से प्रसिद्ध इस नृत्य को और भी पहचान 2009 में मिली, जब इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में परेड के दौरान दिखाई देने वाली झांकी में ‘रम्माण’ को शामिल करने को लेकर लोग काफी उत्साह हैं।

उत्तराखंड के लोगों को भी इंतजार है उस पल का, जब राजपथ पर सलूड के ग्रामीण ‘रम्माण’ की झलक दिखाएंगे। ग्रामीण भरत सिंह, कुशल सिंह, धर्म भंडारी और ऋषि प्रसाद सती का कहना है कि अब तक उन्होंने केवल इसका मंचन गांव में देखा था, मगर इस बार राजपथ पर भी देखने को मिलेगा।

‘रम्माण’ है क्या?
राम कथाओं में सबसे प्राचीन गोरखा युद्ध को प्रदर्शित करती कला को स्थानीय भाषा में ‘रम्माण’ कहा जाता है। इसका मंचन सलूड डुंग्रा के लोग हर साल वैशाखी के बाद पांच दिनों तक रात-दिन आयोजित करते हैं।

इस बार इस नृत्यशैली के गणतंत्र दिवस के मौके पर शामिल होने से लोगों में बस अब उस पल का इंतजार है, जब देश और दुनिया में सलूड गांव की ‘रम्माण’ आकर्षण का केंद्र रहेगी।

गणतंत्र दिवस के मौके पर देश की अन्य पंद्रह झांकियों में शामिल ‘रम्माण’ को लेकर अब स्थानीय लोगों को इंतजार है, उन पलों का जब सलूड-डुंग्रा गांव की चौपाल में आयोजित होने वाली ‘रम्माण’ देश की राजधानी स्थित राजपथ पर जोशीमठ के साथ-साथ देश-विदेश में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेगी।