स्थायी राजधानी को लेकर बयानबाजी चरम पर, लोग पूछ रहे गैरसैंण कब बनेगी राजधानी

एक तरफ जहां उतराखंड की स्थायी राजधानी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी चरम पर है। वहीं गैरसैंण और पहाड़ के लोगों का मानना है कि जब पहाड़ के विकास की अवधारणा के साथ उत्तराखंड का निर्माण हुआ है तो फिर इसकी राजधानी पहाड़ के केन्द्र बिन्दु में क्यों नहीं है? इसक चलते अब लोग खुलकर राजनीतिक बयानबाजी के विरोध में उतर आए हैं।

14 जनवरी 2013 के दिन जब तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की अगुवाई में गैरसैंण में कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी में विधानसभा भवन का शिलान्यास हुआ था, उस समय लोगों को लगा कि शायद अब जिन उद्देश्यों को लेकर उत्तराखंड की स्थापना हुई है वो पूरे होंगे।

इसका विश्वास तब और भी बढ़ने लगा जब मौजूदा मुख्यमंत्री हरीश रावत ने टैंट में यहां विधानसभा चलाकर पहाड़ के प्रति अपनी मंशा जाहिर की। लेकिन जिस तरह से इन दिनों गैरसैंण में राजधानी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी हो रही है उससे न सिर्फ स्थानीय लोगों में रोष है, बल्कि वे गैरसैंण का विरोध करने वालों को ही उत्तराखंड विरोधी बता रहे हैं।

गैरसैंण में सभी क्षेत्रों से जुड़े लोग इसको लेकर न सिर्फ मुखर होने लगे हैं, बल्कि इसके लिए एक बार फिर नए आंदोलन की बात भी करने लगे हैं।

ऐसा नहीं है कि राज्य बनने के बाद यहां कुछ नहीं हुआ। बीजेपी के शासनकाल में यहां वाद्य यंत्र प्रशिक्षण कला केन्द्र की स्थापनी की गई थी। अब मौजूदा कांग्रेस सरकार में यहां विधानसभा भवन के साथ-साथ सचिवालय और विधायक आवास के साथ मंत्री आवास भी बनाए हैं, जो कि निर्माण के अंतिम दौर में पहुंचने लगे हैं, इसके बाद इस तरह की बयानबाजी ने स्थानीय लोगों को और भी उग्र कर दिया है।

बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता खुद को असली पहाड़ हितैषी साबित करने की कोशिश में जुटे रहते हैं। लेकिन जिस तरह से दोनों ही पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ में बनाए जाने को लेकर एकमत नहीं हैं, वो ये बताने के लिए काफी है कि यहां राजनीतिक दलों को पहाड़ के विकास से कोई सरोकार नहीं है।