67वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राजपथ पर राष्ट्रध्वज फहराया और राष्ट्रगान बजाया गया। इसके बाद राष्ट्रपति ने शहीद लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी की पत्नी को देश के सबसे बड़े वीरता सम्मान अशोक चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया। गोस्वामी की पत्नी को अशोक चक्र सौंपते समय प्रणब मुखर्जी के चेहरे पर उनके प्रति दुख साफ झलक रहा था।

उत्तराखंड में हल्द्वानी के पास लालकुआं के बिंदुखत्ता निवासी लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी के 3 सितंबर 2015 को कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद होने की खबर आई तो हर किसी की आंखें नम हो गई थीं। 5 सितंबर को उनके अंतिम संस्कार में जैसे पूरा हल्द्वानी और लालकुआं उमड़ आया था।

अंतिम संस्कार में उमड़ पड़ा था समूचा हल्द्वानी-लालकुआं

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भारत मां की सेवा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी, 9 पैरा (विशेष बल) / राष्ट्रीय राइफल्स की 6ठीं बटालियन, को अदम्य वीरता दर्शाने के लिए देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया गया है।

02 और 03 सितम्बर 2015 की दरमियानी रात को लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हफरूदा जंगल में घात लगाने वाले दस्ते में शामिल थे। रात में चार आतंकवादियों के साथ उनकी भीषण मुठभेड़ हुई। जिसमें उनके 2 साथी घालय होकर गिर पड़े। लांस नायक मोहन अपने दोस्त के साथ अपने सहयोगियों को बचाने के लिए आगे बढ़े। जबकि उन्हें अच्छी तरह पता था कि आगे बढ़ने में उनके जीवन को जोखिम है।

शहीद जांबाज मोहन नाथ गोस्वामी ने 11 दिन में 10 आतंकियों को मार गिराया था

लांस नायक मोहन ने पहले एक आतंकवादी को मार गिराने में मदद की। उसके बाद अपने तीन घायल साथियों की जिंदगी पर आए खतरे को भांपते हुए लांस नायक मोहन अपनी निजी सुरक्षा की परवाह न करते हुए बचे आतंकवादियों पर टूट पड़े, जो भयंकर फायरिंग कर रहे थे। आतंकवादियों की गोली उनकी जांघ में लगी, लेकिन उसकी परवाह न करते हुए उन्होंने एक आतंकवादी को मार गिराया और दूसरे को घायल कर दिया।

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इस बीच एक गोली अचानक उनके पेट में लग गई। उसके बाद भी अपने घावों से बेपरवाह मोहन नाथ ने बचे अंतिम आतंकवादी को दबोच लिया और अपने गंभीर घावों के कारण मौत के आगोश में जाने से पूर्व उस आतंकवादी को भी मार गिराया। लांस नायक मोहन नाथ ने न केवल दो आतंकवादियों को मार गिराया, बल्कि अन्य दो को निष्क्रिय करने में भी सहायता की और अपने तीन घायल साथियों की जान बचाई।

आतंकियों को मार गिराने के बाद शहीद हुआ उत्तराखंड का जवान

इस प्रकार, लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी ने व्यक्तिगत रूप से दो आतंकवादियों को मार गिराने और अपने घायल साथियों का बचाव करने में सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप अपना सर्वोच्च बलिदान देने में सबसे विशिष्ट वीरता का प्रदर्शन किया।

राष्ट्रपति ने 67वें गणतंत्र दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बलों के कर्मियों और अन्य लोगों के लिए 365 वीरता और अन्य रक्षा अलंकरण देने की मंजूरी दी है। इन पुरस्कारों में एक अशोक चक्र, चार कीर्ति चक्र, 11 शौर्य चक्र, सेना मेडल के लिए एक बार (वीरता), 48 सेना पदक (वीरता), 04 नव सेना पदक (वीरता), 02 वायु सेना पदक (वीरता), 29 परम विशिष्ट सेवा पदक, 05 उत्तम युद्ध सेवा पदक, 04 बार अतिविशिष्ट सेवा पदक, 49 अति विशिष्ट सेवा पदक, 20 युद्ध सेवा पदक, सेना पदक के तीन बार (कर्तव्य के प्रति समर्पण), 37 सेना पदक (कर्तव्य के प्रति समर्पण), आठ नव सेना पदक (कर्तव्य के प्रति समर्पण), 16 वायु सेना पदक (कर्तव्य के प्रति समर्पण), 05 बार विशिष्ट सेवा पदक और 118 विशिष्ट सेवा शामिल हैं।