अस्थायी राजधानी देहरादून में चाय बागान पर ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों, वहां काम कर रहे श्रमिकों, पर्यावरणविदों और मुख्य विपक्षी बीजेपी के साथ अब आम आदमी पार्टी (AAP) भी खड़ी हो गई है।

चाय बागान पर ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को रियल्टी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एम्मार एमजीएफ तथा कथित रूप से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के परिवार और वाड्रा परिवार को लाभ पहुंचाने वाला बताते हुए आप कार्यकर्ताओं ने शनिवार को प्रस्तावित जगह पर जोरदार प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले उत्तराखंड AAP के वरिष्ठ नेता अनूप नौटियाल ने आरोप लगाया कि ‘स्मार्ट सिटी’ के लिए चाय बागान की भूमि का चयन एक पूर्व नियोजित रणनीति का हिस्सा है और एम्मार एमजीएफ को फायदा पहुंचाने के लिए ही राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा परियोजना के लिए चिन्हित की गई 350 एकड़ जमीन देहरादून टी कंपनी (डीटीसी) की है और इस कंपनी के 73 प्रतिशत शेयर श्रवण गुप्ता और उनकी पत्नी शिल्पा गुप्ता के नाम हैं। डीटीसी के पास चाय बागान की कुल 1127 एकड़ भूमि है।

इस संबंध में नौटियाल ने याद दिलाया कि गुप्ता दंपति एम्मार एमजीएफ के प्रमोटर्स हैं, जिन्होंने डीटीसी के शेयर खरीदने के लिए लॉजिकल बिल्डवैल, अमरदीप प्रापर्टीज और कैमियो रियलटर्स सहित छह विभिन्न कंपनियां बनाई हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पूर्व सहयोगी और फिलहाल प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी कनिष्क सिंह श्रवण गुप्ता के कजिन हैं और सिंह ने ही गुप्ता तथा उनके दादा वीपी गुप्ता के साथ मिलकर एमजीएफ समूह की स्थापना की थी।

नौटियाल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक पत्र लिखकर राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को अयोग्य घोषित करने की मांग की है तथा कहा है कि इस संबंध में कोई निर्णय लेने से पहले उनके द्वारा सामने लाए गए तथ्यों की सच्चाई भी परख लें।

आप नेता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है, ‘मैं आपका ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूं कि उत्तराखंड की कांग्रेस नीत सरकार ने कथित रूप से यह प्रस्ताव गांधी और वाड्रा परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए भेजा है। चाय बागान पर ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के प्रस्ताव का वहां काम कर रहे श्रमिक और स्थानीय ग्रामीणों के अलावा बीजेपी और पर्यावरणविद भी विरोध कर रहे हैं।

इस बीच, मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस संबंध में राज्य सरकार का रुख साफ करते हुए कहा कि चाय बागान के अलावा देहरादून शहर के आसपास इतनी भूमि उपलब्ध नहीं थी और इसीलिए ‘स्मार्ट सिटी’ के लिए यह सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।

रावत ने यह भी कहा है कि बागान में कार्यरत श्रमिकों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। साथ ही, ‘स्मार्ट सिटी’ परियोजना का एक बडा हिस्सा ‘‘ग्रीन कवर’ के रूप में छोड़ा जाएगा।