अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने डीकोड किया था ISIS का कोडवर्ड “7 कलश रख दो”

सुरक्षा एजेंसियों ने देश के अलग-अलग इलाकों से शुक्रवार को 18 संदिग्ध पकड़े. ये सभी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के लिए काम कर रहे थे. ऐसा पहली बार हुआ कि इतने बड़े पैमाने पर भारत में आईएस की मौजूदगी की आशंका के सुराग हाथ लगे. हमारी सुरक्षा एजेंसियों को यह कामयाबी अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की मदद से मिली है.

दरअसल, ये सभी संदिग्ध आतंकी कोड वर्ड में बातचीत करते थे और एक दूसरे से इसी कोड भाषा के जरिए संपर्क में थे. सीआईए को किसी तरह इस बातचीत का पता चल गया. इनका कोड वर्ड था- ‘7 कलश रख दो.’ सीआईए ने इसे डिकोड किया और भारतीय एजेंसियों को अलर्ट कर दिया. 7 कलश से मतलब सात जगहों पर ब्लास्ट करने से था.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सीआईए लगातार पश्चिमी एशिया में कंप्यूटर और फोन पर आईएस की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है. पिछले हफ्ते सीआईए की तरफ से मिली इस जानकारी के आधार पर ही हमारी खुफिया एजेंसियों को आईएस सेल को ध्वस्त करने में सफलता मिली है.
सूत्रों ने बताया कि सीरिया और इराक में आईएस जो सैकड़ों कंप्यूटर और स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहा है, उनके आईपी एड्रेस पर सीआईए की नजर है. आईएस के लोग कई आईपी एड्रेस का इस्तेमाल फेसबुक के लिए भी कर रहे थे. इन्हीं में से एक था आईएस का कमांडर शाफी अरमार था, जिसका कोड नाम यूसुफ अल हिंदी था. उसी ने भारत में अखलाक उर रहमान से बात की थी, जिसके बाद अखलाक सहित चार को गिरफ्तार कर लिया गया.

गणतंत्र दिवस पर आतंकी हमले के मद्देनजर एनआईए और एटीएस ने शुक्रवार को देश में ISIS के नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए कुल 18 संदिग्धों को दबोचा.