आम लोगों की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में खाद्य सुरक्षा जैसी सुविधा लागू है, जिससे गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था होती है। लेकिन जनता को सस्ता राशन उपलब्ध करवाने की यह योजना उत्तराखंड में तो पटरी से उतर गई है। गोदाम से कोटेदारों के कोटे में कमी करने का खामियाजा राशन कार्ड धारक भुगत रहे हैं। बिना सूचना के निर्धारित कोटे में कट लगने से कुछ ही लोगों को राशन मिल पा रहा है, जबकि दुकान मालिकों को जनता का गुस्सा झेलना पड़ा रहा है।

सरकार ने बिना आकलन 65 हजार उपभोक्ताओं के राशन का कोटा गोदाम में भेजना बंद कर दिया, जिससे पूरी सप्लाई चैन बाधित हो गई है। ऐसे में उपभोक्ता तो परेशान हैं ही, कोटेदारों को भी कम राशन देने की शिकायतें झेलनी पड़ रही हैं। जिला पूर्ति विभाग के अधिकारी भी पशोपेश हैं कि आखिर सस्ते गल्ले की दुकान के लिए कहां से राशन लाएं।

उधर, कोटा कम होने के बाद कोटेदारों ने अपने स्तर से वितरण का फार्मूला खोज लिया है। वे ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर राशन दे रहे हैं। जो लाभार्थी राशन से वंचित रह जा रहे हैं, उन्हें अगले महीने का आश्वासन मिल रहा है।

करें भी क्या, राज्य खाद्य योजना की प्रक्रिया अभी चल रही है। मार्च तक उपभोक्ताओं को इस योजना में शामिल होने के लिए राशन कार्ड का नवीनीकरण करवाना है, लेकिन इससे पहले ही सरकार ने 65 हजार कार्ड धारकों को अधिक मान कर विभाग का कोटा घटा दिया। इससे कोटेदारों को राशन मिलना कम हो गया है, जबकि कार्ड धारक उतने ही हैं।

जिलापूर्ति विभाग ने कोटेदारों को निर्देश दिया है कि वह उपभोक्ताओं के राशन में कटौती न करें। उपभोक्ताओं को पुराने राशन कार्ड पर मार्च तक पूरा राशन मिलना चाहिए। ऐसे में कोटेदार बीच मझधार में फंसे हुए हैं कि वह राशन किसको दें और किसको न दें। क्योंकि मार्च के आखिरी दिन तक एपीएल के सभी राशन कार्ड मान्य हैं। इसके बाद नए सिरे से कोटा कुल नवीनीकरण हुए राशन कार्ड के हिसाब से मिलने लगेगा।

ऐसी है व्यवस्था और हकीकत
गेहूं पांच किलो का प्रावधान, विभाग दे रहा तीन किलोग्राम
चावल दस किलो, विभाग से मिल रहा 6 से 7 किलोग्राम
चीनी प्रति कार्ड 500 ग्राम, विभाग से मिल रही 400 ग्राम