रुद्रप्रयाग जिले के अंतिम गांव गौंडार को देश की आजादी के 68 साल बाद आखिरकार अंधेरे से आजादी मिल ही गई। इस गांव में आजादी के सात दशक बाद बिजली बिजली पहुंच गई है। उरेड़ा ने सौ किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण पूरा करने के साथ ही गांव में सप्लाई का सफल ट्रायल किया है।

गौंडार अभी तक रुद्रप्रयाग जिले का एकमात्र गांव था जो बिजली व्यवस्था से महरूम था। अब गांव सहित बनतोली और मकोड़ा में रह रहे 82 परिवारों ने अपने घरों में बिजली फिटिंग सहित अन्य जरूरी काम कराना भी शुरू कर दिया है। केदारनाथ की विधायक श्रीमती शैलारानी रावत ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन किया।

रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ तहसील में मद्महेश्वर घाटी के दूरस्थ गांव गौंडार को आजादी के 68 साल बाद बिजली नसीब हो पाई है। भगवान मद्महेश्वर यात्रा का मुख्य पड़ाव होने के साथ ही गौंडार के ग्रामीणों की आजीविका यात्रा पर ही निर्भर है। ऐसे में गांव में बिजली पहुंचने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।

आपदा प्रभावित गांव गौंडार के विद्युतीकरण की जिम्मेदारी अगस्त 2013 में ऊर्जा निगम से स्थानांतरित कर उरेड़ा को सौंपी गई थी। अप्रैल 2014 से उरेड़ा ने यहां काम शुरू किया। गांव के विद्युतीकरण के लिए सौ किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना पर 50-50 किलोवाट की दो टर्बाइन लगाई गई हैं।

गांव तक बिजली सप्लाई के लिए तीन किमी की एचटी (हाई टेंशन) और 2.7 किमी एलटी (लो-टेंशन) विद्युत लाइनें बिछाई गई हैं। पॉवर हाउस के अलावा पांच ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं, जिसमें तीन 25 केवी और दो ट्रांसफार्मर 63 केवी के हैं।
घर-घर तक सप्लाई के लिए हाईटेंशन लाइन पर 39 और लो-टेंशन लाइन पर 48 विद्युत पोल लगाए गए हैं। दो करोड़ बीस लाख रुपये की लागत से बनी लघु विद्युत परियोजना डेढ़ साल में बनकर तैयार हुई है। परियोजना की देखरेख और गांव में विद्युत कनेक्शन वितरण के लिए एक ऑपरेटर की तैनाती की गई है।