उत्तराखंड क्रांति दल ने पृथक राज्य के लिए भले ही जितनी मेहनत की हो, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक यह पार्टी नहीं पहुंच पाई। इसका नतीजा यह रहा कि पार्टी में कई धड़े बन गए और हर कोई अपने को असली यूकेडी कहने लगा। पार्टी कभी सत्ता की कुर्सी तक तो नहीं पहुंची, लेकिन इन दिनों कुर्सी के लिए जंग जरूर दिख रही है।

दरअसल यह कुर्सी सत्ता की कुर्सी नहीं बल्कि पार्टी का असली चुनाव चिन्ह है। पार्टी में इस कुर्सी का किस्सा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दो गुटों के बीच कुर्सी को लेकर जारी खींचतान का मामला चुनाव आयोग के दखल के बाद भी सुलझता नहीं दिख रहा है।

बुधवार को ही पहले पुष्पेश त्रिपाठी ने पत्रकार वार्ता कर कुर्सी चुनाव चिन्ह मिलने का दावा किया। गुरुवार को दूसरे गुट ने गलत तथ्य देने का आरोप लगाते हुए कुर्सी चुनाव चिन्ह को सीज रखने की मांग कर दी।

UKD-chair-symbolकेंद्रीय चुनाव आयोग को भेजे पत्र में त्रिवेंद्र सिंह पंवार गुट के लताफत हुसैन ने बताया कि पुष्पेश त्रिपाठी और काशी सिंह ऐरी को पहले ही संगठन से बाहर निकाला जा चुका है। जब वह दल के सदस्य ही नहीं हैं तो पदाधिकारी कैसे हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें चुनाव चिन्ह आवंटित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए कोर्ट का फैसला आने तक कुर्सी चुनाव चिन्ह को सीज रखा जाना चाहिए। ऐसा न होने पर उन्होंने कोर्ट में जाने की चेतावनी दी है।

उत्तराखंड क्रांति दल को क्षेत्रीय दल की मान्यता और कुर्सी चुनाव चिन्ह मिलने पर पुष्पेश त्रिपाठी गुट के कार्यकर्ताओं ने खुशी का इजहार किया। जाखन में कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। इस मौके पर जयप्रकाश उपाध्याय, गोविंद, अमरदीप, संजय खंडूरी, विकास खरोला, शिवम थपलियाल, अंकित, सौरभ, विकास, आदित्य, शुभम, मनीष, गोविंद, धीरेंद्र, विजय, राजेश्वर सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।