उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी और उनकी पत्नी के बीच तीसरे बेटे को लेकर परिवार न्यायालय में चल रहे विवाद में डीएनए रिपोर्ट सामने आ गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मां-बेटे का डीएनए तो समान पाया गया है, जबकि साहब सिंह सैनी के डीएनए से बेटे का डीएनए मिलान नहीं हो पाया है। इसका सीधा अर्थ हुआ कि तीसरा बेटा साहब सिंह का जैविक पुत्र नहीं है।

हालांकि याचिकाकर्ता ने अदालत से किसी अन्य एजेंसी से डीएनए जांच कराने की मांग की है। अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि दस फरवरी तय की है।

sahab-singh-sainiयूपी के कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी की पत्नी ने परिवार न्यायालय में वाद दायर किया है। कोर्ट ने साहब सिंह सैनी को अपनी पत्नी को तीन हजार रुपये भरण-पोषण देने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ मंत्री ने याचिका दायर की है।

मंत्री ने पत्नी के तीसरे बेटे को अपना जैविक पुत्र होने से इनकार करके अपनाने से मना कर दिया था। कोर्ट ने इस मामले में 11 जून 2015 को डीएनए जांच कराने के आदेश दिए।

ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए। इसकी रिपोर्ट 23 दिसंबर को कोर्ट में पहुंची, जिसमें पत्नी और बेटे का डीएनए सैंपल समान पाया गया, जबकि साहब सिंह सैनी और बेटे का सैंपल फेल हो गया और साहब सिंह का शक सही निकला। मंगलवार को कोर्ट में मामले की तारीख थी। इस दौरान याची की ओर से रिपोर्ट का विरोध किया गया।

याचिकाकर्ता ने प्रार्थना पत्र देकर अन्य एजेंसी से फिर से डीएनए जांच कराने की मांग कोर्ट से की। जवाब में मंत्री के वकील आलोक घिल्डियाल ने आपत्ति जताई है। इस पर कोर्ट ने अगली तिथि पर आपत्ति दाखिल करने को कहा है।