उत्तराखंड में बादल फटना और अत्यधिक बारिश से तबाही जैसी घटनाएं आम बात हैं। सटीक पूर्वानुमान और जानकारी के अभाव में कई बार लोगों को इन आपदाओं में अपनी जान गवानी पड़ती है, लेकिन अब मौसम के पूर्वानुमान के लिए नैनीताल का एरिज वायुमंडल विज्ञान में नए आयाम छूने जा रहा है।

इससे न सिर्फ मौसम की सटीक जानकारी लोगों तक पहुंचेगी बल्कि बारिश, बर्फबारी और मौसम से जुड़ी जानकारी भी मिलेगी। नैनीताल का एरिज भारत का दूसरा और एशिया में हिमालयी क्षेत्र के पहले रडार से बस दो कदम दूर है।

नैनीताल आर्य भट्ट प्रेक्षण संस्थान में इन दिनों एसटी रडार का काम तेजी से चल रहा है। यहां बन रहे इस रडार की क्षमता काफी ज्यादा है, जो मौसम का पूर्वानुमान की सटीक जानकारी देगा।

इससे पहले आंध्र प्रदेश के तिरूपति में 53 मेगाहर्टज एमएसटी रडार लगा है, जिसके बाद 206 हर्टस क्षमता रडार यहां बन रहा है, जो करीब 6 महीने बाद अपना काम करना शुरू कर देगा। 588 एंटिना से संचालित होने वाला यह रडार वायुमंडल में 60 मील यानी 150 किलोमीटर ऊंचाई पर बहने वाली हवाओं पर नजर रखेगा।

गौरतलब है कि इस एसटी रडार से मौसम की सटीक जानकारी के साथ हवाओं की गति पर नजरें रखी जाएंगी। इसके साथ ही पहाड़ी राज्यों के मौसम के बदलते मिजाज पर भी जानकारियां 24 घंटे पहले मिल जाएंगी।

बादल फटने, तूफान आने के साथ बारिश से होने वाली तबाही का भी पूर्वानुमान इस रडार से लगाया जा सकेगा। एरिज के मौसम वैज्ञानिक नरेंद्र सिंह का कहना है कि राज्य में बारिश और तूफान आने से पहले इस रडार के जरिए ये बताया जा सकेगा कि कहां इसका प्रभाव पड़ेगा।

साथ ही बादल फटने और आपदा आने के भी संकेत इस एसटी रडार से मिल सकेगा। रडार के लगने से यहां शोध के साथ मौसम की जानकारी के लिए यह सही पैरामिटर साबित होगा।