नैनीताल जिले में बना कॉर्बेट टाइगर रिजर्व यहां बाघों की प्रजाति को संरक्षित करने और बढ़ाने के लिए देश-विदेश में जाना-पहचाना जाता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ी है और यह बाघों के मामले में देश-विदेश में अव्वल भी है, लेकिन यहां की सुरक्षा व्यवस्था अभी तक तो भगवान भरोसे ही चल रही है। यहां फ्रंट लाइन स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है।

यहां वन रक्षकों के 256 पदों के मुकाबले 166 पद ही भरे हुए हैं, जिसमें 90 वन रक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। ऐसे में इन बाघों की सुरक्षा कैसे हो यह सवाल वन्यजीव प्रेमियों को सता रहा है। बाघ बचाओ समित के अध्यक्ष मदन जोशी कहते हैं कि बाघ और हाथी विभाग और स्थानीय लोगों की जागरुकता के कारण ही बढ़े हैं, लेकिन इतना कम स्टाफ बाघ की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस ओर राज्य और केंद्र सरकार को ध्यान देना होगा, तभी हम अपने राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा कर पाएंगे।

इसके अलावा यहां के लिए गठित होने वाले एसटीपीएफ का गठन भी सालों बीत जाने के बाद भी नहीं हो पा रहा है, जिस पर भी जोशी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि करीब आठ-नौ साल पहले से एनटीसीए की ओर से 112 सदस्यों की एसटीपीएफ टीम गठित करने की मंजूरी मिल गई थी, लेकिन इसको इस तरह से लटकाए रखना वन्यजीव संरक्षण पर भारी पड़ सकता है।

इस बारे में टाइगर रिजर्व के निदेशक समीर सिन्हा की मानें तो बाघों और हाथियों के बढ़ने से निश्चित रूप से उनकी चुनौतियां बढ़ गई हैं। वन रक्षकों के कुछ पद जल्द भर लिए जाएंगे। इसके साथ ही एसटीपीएफ के गठन की प्रक्रिया भी शासन स्तर पर चल रही है।

टाइगर रिजर्व प्रशासन इनकी सुरक्षा के लिए राज्य सरकार और एनटीसीए से भी यहां और पद दिए जाने की मांग कर रहा है। इसके साथ-साथ यहां दैनिक वनकर्मियों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग भी इनसे की जा रही है, जिससे कि बाघ और हाथी जैसे वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रह सकें।