उत्तराखंड के गन्ना किसान राज्य की हरीश रावत सरकार से नाराज हैं। गन्ना किसानों के भुगतान के प्रति सरकार के ढुलमुल रवैये के चलते किसान 60 से 70 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाते हुए भी नगद भुगतान पर गन्ना उत्तर प्रदेश को बेच रहे हैं। स्थानीय स्तर ही नहीं उच्चाधिकारियों को भी गन्ने की यूपी को जाने वाली सप्लाई की जानकारी है, लेकिन पिछला भुगतान न होने से कोई भी आक्रोशित किसानों को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

उत्तराखंड से गन्ने का उत्तर प्रदेश जाने का यही सिलसिला रहा तो 15 फरवरी तक गन्ना खत्म हो सकता है। पिछले साल के गन्ने का भुगतान अब तक नहीं होने से सबसे ज्यादा खामियाजा उन किसानों को झेलना पड़ रहा है, जो ब्याज पर रुपये लेकर अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं। ऐसे में किसान घाटे पर ही सही पर नगद भुगतान होने के कारण गन्ना बेच रहे हैं। इसका फायदा भी उठाने वाले कम नहीं हैं।

सीमावर्ती क्षेत्र सिसैया, मेलाघाट, वगुलिया, खालीमहुवट, नगरा तराई, दमगड़ा सहित जमौर, भगचूरी, हल्दी पचपेड़ा, मझोला, दाह ढाकी, नौसर, बंडिया, जादोपुर, उलानी, सुनपहर सहित विकासखंड के अधिकांश गन्ना बहुल क्षेत्रों से 220 से 235 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना खरीदकर उत्तर प्रदेश बार्डर तक ले जाते हैं और फिर ट्रकों से यह गन्ना यूपी की मिलों में चला जाता है। किसानों को पिछले साल का भुगतान नहीं मिल सका है, जबकि वर्तमान पेराई सत्र तीन दिसंबर से शुरू हो चुका है।