उत्तराखंड के स्कूली पाठ्यक्रम में कक्षा एक से दसवीं तक अब गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी के साथ ही (धारचूला में रहने वाली) भोटिया जनजाति की बोली ‘रं’ को भी शामिल किया जाएगा।

लोक भाषाओं के बारे में मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। एससीईआरटी की निदेशक कुसुम पंत बताती हैं कि इसी महीने राज्य की छह डायटों (जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान) में कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, इसमें विषय विशेषज्ञ पाठ्य सामग्री तैयार करेंगे।

समूचे राज्य में 75 लाख से अधिक लोग गढ़वाली और कुमाऊंनी बोलते एवं समझते हैं। कई किताबें गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी में प्रकाशित हुई हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों में इन भाषाओं पर शोध हो रहे हैं, लेकिन राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में इन्हें शामिल नहीं किया गया है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की निदेशक कुसुम पंत के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य की लोक भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने की पहल की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुमाऊंनी के संबंध में अल्मोड़ा में 18 जनवरी को आयोजित कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ पाठ्यसामग्री तैयार करेंगे।

इसी महीने जौनसारी के बारे में दून डायट में, गढ़वाली के बारे में चमोली डायट में और रं के संबंध में पिथौरागढ़ में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि लोक भाषाओं के अलावा हर जिले की संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्षेत्र की विशिष्ट पहचान के संबंध में रुड़की और रुद्रपुर के डायटों में काम किया जा रहा है।

राज्य की विभिन्न छह डायटों के बाद राज्य स्तर पर विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित कर पाठ्य सामग्री तैयार की जाएगी।