उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून के नारी निकेतन में मूक-बधिर संवासिनी के साथ रेप के मामले में एसआईटी ने एक और गिरफ्तारी की है। ये गिरफ्तारी सफाई कर्मचारी के डीएनए सैंपल के मिलान के बाद हुई है।

अभी तक नारी निकेतन में तैनात 9 कर्मचारियों की गिरफ्तारियों से साफ हो चला है कि यहां पर इन मासूमों के साथ काफी दिनों से अत्याचार हो रहा है, जिससे पूरे सिस्टम पर ही कई सवाल खड़े हो गए हैं।

इस मामले को काफी दबाने और रफादफा करने की भी कोशिश की गई है, लेकिन एसआईटी की जांच ने अब सबकुछ साफ कर दिया है। रेप से लेकर साक्ष्य छिपाने के आरोप में अभी तक 9 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिसमें पांच नारी निकेतन स्टॉफ की महिलाएं भी शामिल हैं।

सबसे ख़ास बात ये है कि कोर्ट के आदेश के बाद एसआईटी ने गिरफ्तार ललित और हासिम के डीएनए सैंपल लिए थे, लेकिन सबूतों के अभाव में आरोपी सफाई कर्मचारी गुरुदास की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। डीएनए सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद अब गुरदास को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

अब तक क्या-क्या हुआ?
पिछले साल 17 नवंबर को मूक-बधिर संवासिनी के साथ रेप का मामला उजागर हुआ
25 नवम्बर को एसआईटी का गठन हुआ।
29 नवंबर को पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए।
30 नवम्बर को केयर टेकर हासिम और होम गार्ड ललित की गिरफ्तारी हुई।
4 दिसम्बर को साक्ष्य छिपाने के आरोप में 3 महिलाओं सहित 4 की गिरफ्तारी हुई।
13 दिसम्बर को अधीक्षक मीनाक्षी पोखरियाल और शिक्षक की गिरफ्तारी हुई।
6 जनवरी को डीएनए रिपोर्ट आने के बाद सफाईकर्मचारी गुरदास की गिरफ्तारी।
अभी तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी करके जेल भेजा जा चुका है।

माना ये ही जा रहा है कि एसआईटी ने अपनी जांच में अभी तक जितनी भी गिरफ्तारी की है उसमें गुरदास की गिरफ्तारी सबसे अहम है, क्योंकि मूक-बाधिर संवासिनी के भ्रूण के साथ गुरदास के डीएनए सैंपल पॉजीटिव हैं। वहीं अब दावा किया गया है कि एसआईटी चार्जशीट जल्द ही कोर्ट में पेश करेगी।