सिर मुंडवाते ही ओले पड़ने वाली कहावत उत्‍तराखंड बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट पर एकदम सटीक बैठती है। इधर उन्होंने राज्य में पार्टी की कमान संभाली और उधर हरिद्वार पंचायत चुनाव के नतीजों ने उनके सामने नई मुसीबत ला खड़ी कर दी है।

बीजेपी सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से लेकर पूर्व अध्यक्ष तीरथ रावत सहित पार्टी के तमाम सूरमा भी हरिद्वार में पार्टी की लाज नहीं बचा पाए। किसी भी दिग्गज का करिश्मा बीजेपी की डूबती नैया को किनारे नहीं लगा पाया। 2017 के महासंग्राम के सेमीफाइनल के तौर पर देखी जा रही हरिद्वार पंचायत की जंग में बीजेपी को बुरी तरह से मुंह की खानी पड़ी है।

हरिद्वार जिले के पंचायत चुनावों में बसपा और कांग्रेस ने 15-15 सीटों पर कब्‍जा कर लिया। निर्दलीयों ने भी 14 सीटें हासिल कर ली, लेकिन राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए छटपटा रही बीजेपी सिर्फ तीन सीटों तक ही सिमट गई। बीजेपी दफ्तर में पसरा सन्नाटा यह बताने के लिए काफी है कि कैसे बीजेपी के रणनीतिकार अब हरिद्वार पंचायत चुनाव की जवाबदेही से नजरें चुराते भाग रहे हैं।

इधर, बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट अभी पार्टी कार्यकर्ताओं की सोई हुई चेतना को जगाने निकले ही थे कि हरिद्वार की जनता ने उन्हें पंचायत चुनाव की करारी हार का तोहफा दे डाला।

पहले सितारगंज विधानसभा उप-चुनाव, फिर पंचायत चुनाव, उसके बाद तीन विधानसभा के उप-चुनाव, फिर भगवानपुर उप-चुनाव और अब हरिद्वार पंचायत चुनाव। एक-एक कर सभी चुनावों में बीजेपी ने ऐसी मुंह की खाई कि संभलने तक का मौका नहीं मिला।

लोकसभा चुनाव में हरिद्वार जिले में बीजेपी का बेहतरीन प्रदर्शन रहा था। हरिद्वार की जनता ने बीजेपी सांसद रमेश पोखरियाल निशंक को पलकों पर बिठा लिया, लेकिन पंचायत चुनाव में निशंक भी पार्टी को इस शर्मनाक हार से बचा नहीं पाए। अपनी लोकसभा होने के बावजूद भी पार्टी की डूबती वैतरणी को पार नहीं लगा पाए। भले डोईवाला जैसी विधानसभा में तमाम विपरीत परिस्थितियों और पैराशूट प्रत्याशी होने के बावजूद निशंक अपना करिश्मा दिखा गए, लेकिन हरिद्वार पंचायत चुनाव में उनका जादू नहीं चला।

हरिद्वार से बूजेपी के तेज तर्रार नेता और नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के प्रबल दावेदार पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी जनता की नब्ज को टटोल नहीं सके। पंचायतों की मजबूती के लिए केंद्र सरकार की पहल को भी बीजेपी ग्रामीण जनता के बीच जाकर भुना न पाई।

कहना होगा कि पिछले पंचायत चुनाव में 7 जिला पंचायत सीटें कब्जाने वाली बीजेपी का इस कदर ग्राफ गिरना कहीं न कहीं पार्टी के लिए बड़ी परेशानी का सबब हो सकता। वजह साफ है कि हरिद्वार पंचायत चुनाव 2017 चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखे जा रहे हैं और यहां बीजेपी को करारा झटका लगा है।