सांकेतिक तस्वीर

पूरे उत्तराखंड में ग्राम प्रधान जहां राज्य वित्त समाप्त करने पर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, वहीं अब जिला पंचायत और बीडीसी भी अपने विकास मद में कटौती कर उसे ग्राम प्रधानों को देने को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ खड़े गए हैं।

ग्राम प्रधानों, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों के आंदोलन का दामन थामने पर जनप्रतिनिधियों में टकराव की स्थितियां पैदा हो गई हैं। ग्राम पंचायतों को विकास की पहली सीढ़ी कहा जाता है, लेकिन ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि ही अगर केंद्र और राज्य की राजनीति में शामिल हो जाए, तो फिर ग्रामीण विकास की सूरत क्या हो सकती है, कोई भी अंदाजा लगा सकता है।

वर्तमान में सीमांत क्षेत्र खटीमा में ग्राम प्रधान राज्यभर में राज्य वित्त मद को समाप्त किए जाने को लेकर जहां राज्य सरकार के खिलाफ मुखर हैं, वहीं अब क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य 13वें और 14वें वित्त को काटकर प्रधानों को देने को केंद्र सरकार का गलत फैसला बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए हैं।

ब्लॉक परिसर में प्रधान जहां राज्य सरकार के खिलाफ हैं, तो दूसरी और क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। राज्य और केंद्र की मुखालफत में लगे ये जनप्रतिनिधि जहां जमकर राजनीति कर रहे हैं, वहीं इस सबके बीच ग्रामीण जनता पिसती नजर आ रही है।

सोमवार से धरने पर बैठे बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य जहां केंद्र के फैसले को गलत बताकर मांगों के पूरा न होने तक आंदोलन की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ग्राम प्रधान जहां बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों के इतनी देर से जागने पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। फिलहाल जनप्रतिनिधियों के आंदोलन से टकराव की स्थितियां जरूर पैदा होती दिख रही हैं।