गंगा बेसिन में जलवायु परिवर्तन की स्थिति देखने निकले विज्ञानियों को मिले नमूने चौंकाने वाले हैं। नमूनों की रासायनिक जांच में तीन सौ साल पहले आए हिमयुग की तस्वीर उभरी है। यही नहीं गंगा बेसिन में आई बड़ी बाढ़ आपदाओं के सबूत भी मिले हैं।

गंगा बेसिन के सर्वेक्षण के लिए निकली वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान की टीम ने बेसिन केकई स्थानों से नमूने जुटाए थे। नमूनों की रासायनिक जांच से पता चला है कि तीन सौ साल पहले गंगा बेसिन छोटे हिमयुग के दौर से गुजरा था। यह वही दौर था, जिसे कुछ वैज्ञानिक हिमालय में सूखे का दौर मानते रहे हैं। नमूनों की जांच में पाया गया है कि इस दौरान कुछ अलग तरह की बरसात हुई थी।

निचले हिमालय में पानी टूटकर बरसा था, जबकि हिमालय का ऊपरी क्षेत्र सूखा रहा। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन का नतीजा मान रहे हैं। इस दौरान मानसून निचले हिमालय में आकर रुक गया था। वैज्ञानिकों ने जांच के बाद यहां के जलवायु आंकड़ों को सुरक्षित कर लिया है।

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इससे मौजूदा वक्त में जलवायु परिवर्तन की स्थिति को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने चमोली जिले के श्रीनगर क्षेत्र से गंगा की सहयोगी नदी अलकनंदा के किनारे से भी साक्ष्य जुटाए हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक छोटे हिमयुग के दौरान ही गंगा बेसिन में कई फ्लड्स प्लेन्स की रचना हुई थी। उल्लेखनीय है कि गंगा बेसिन आज भी एक हजार वर्षों में आईं 22 बड़ी बाढ़ आपदाओं की निशानियां खुद में संरक्षित किए हुए है।