उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून के दून अस्पताल में तीन और संवासिनियों को भर्ती कराया गया है। इस तरह से कुल 15 संवासिनियां अस्पताल में भर्ती हैं। लगातार नारी निकेतन की संवासिनियों की तबियत खराब हो रही है, जिसको लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

इसमें एक संवासिनी गर्भवती है, जिसका दून महिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। फिलहाल सभी संवासिनियों के लिए अस्पताल में अलग से वार्ड बनाया गया है। दून अस्पताल के ईएमओ डॉ. राहुल जोशी का कहना है कि दून अस्पताल में अलग से संवासिनियों को भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।

साथ ही कहा कि इसके लिए डॉक्टर्स का एक पैनल भी बनाया गया है। फिलहाल जिस तरह से लगातार संवासिनियों की सेहत खराब हो रही है, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा भी तेज हो गई है। बीजेपी महानगर के कार्यकर्ताओं ने नारी निकेतन में हुए यौन शोषण और दो संवासिनियों की मौत के साथ लगातार संवासिनियों की बिगड़ रही सेहत की सीबीआई से जांच कराने की मांग को लेकर नारी निकेतन का घेराव किया। इस मौके पर भारी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

पार्टी का कहना है कि सरकार दोषी अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि पार्टी किसी तरह से कोई भी जांच नारी निकेतन में नहीं कराना चाहती है। पार्टी का कहना है कि अस्थायी राजधानी देहरादून में जिस तरह से सरकार की नाक के नीचे अधिकारी मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं, इससे एक बात साफ हो गई है सरकार की अधिकारियों पर कोई लगाम नहीं है, जिसकी वजह से नारी निकेतन के मामले का खुलासा नहीं हो पा रहा है।

अब बड़ा सवाल यह भी है कि नारी निकेतन की ऐसी संवासिनियों जो न तो बोल पाती है और न सुन पाती है, उनकी पीड़ा को कैसे समझा जा सकता है। महज मुट्ठीभर कर्मचारियों के भरोसे आखिर 103 संवासिनियों की देखरेख कैसे हो सकती है।