बागेश्वर को अलग जिला बने करीब 19 साल हो चुके हैं, उस समय उत्तराखंड अलग राज्य भी नहीं बना था। इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी आज तक जिले में रोडवेज डिपो का अभाव बना हुआ है। बता दें कि साल 1997 में बागेश्वर जिला अस्तित्व में आया था।

इसके बाद से आज तक लोगों को जिले में यातायात के लिए सिर्फ टैक्सियों का सहारा लेना पड़ रहा है। बेशक अन्य रोडवेज डिपो की कुछ बसें लंबी दूरी के लिए बागेश्वर के लिए भी संचालित की जाती हैं, जिनकी संख्या भी बेहद सीमित है।

आज भी लोगों को जिले के भीतर सभी मार्गों पर टैक्सी और केएमओयू के वाहनों के भरोसे रहना पड़ता है। वहीं सफर पर निकले लोगों को कई बार घंटों इंतजार के बाद गाड़ी मिल पाती है।

लोगों का कहना है कि ये राज्य सरकार की उपेक्षा ही है, जिसके चलते ये सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रही है। वहीं इस मामले पर कपकोट से कांग्रेस विधायक ललित फर्सवाण का कहना है कि लंबे समय से ये डिपो निर्माणाधीन है और इस बारे में मुख्यमंत्री से बातचीत की गई है।

फर्सवाण ने कहा, डिपो निर्माण को लेकर धन भी दे दिया गया है।