धार्मिक नगरी हरिद्वार में शुक्रवार 1 जनवरी के आधिकारिक तौर पर शुरू हुए अर्द्धकुंभ में महिला संतों के शिविर लगाने और स्नान करने के ऐलान ने मेला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

महिला संतों के अखाड़ा परी ने मेला प्रशासन से 10 एकड़ जमीन की मांग की है। इसके आलावा अखाड़ा परी ने महिला संतों के लिए कुंभ में स्नान के लिए अलग से व्यवस्था करने की भी मांग की है।

बता दें कि नासिक कुंभ के लिए भी अखाड़ा परी ने शिविर और स्नान के लिए अलग से व्यवस्था करने की मांग की थी, लेकिन नासिक कुंभ में अखाड़ा परी को सिर्फ शिविर के लिए ही जमीन ही मिल पाई थी।

अखाड़ा प्रमुख महंत त्रिकाल भवंता ने महिलाओं के इस अखाड़े में दस हजार से ज्यादा महिला संत होने का दावा किया है। गौरतलब है कि इलाहाबाद कुंभ (2014) में पहली बार महिला संतों ने शैव, वैष्णव और उदासीन संप्रदाए के 13 अखाड़ों के अलावा एक महिला अखाड़े का अगाज किया था।

इस महिला अखाड़े का नाम श्री सर्वेश्वर महादेव वैकुंठधाम मुक्तिद्वार अखाड़ा परी रखा गया था। मंहत त्रिकाल भवंता को अखाड़े का प्रमुख बनाया गया, हालांकि अभी तक न तो अखाड़ा परिषद और न शंकराचार्यों की ओर से महिला संतों के इस प्रयास को स्वीकारा गया है। अभी तक उनकी तरफ से अखाड़ा परी को भी मान्यता नहीं मिल पाई है।

परी अखाड़े के स्नान को लेकर अर्द्धकुंभ मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन का कहना है कि इस तरह की कोई मांग किसी ने अभी तक उनसे नहीं की है। अगर कोई इस तरह के शाही स्नान की मांग करता है तो पूर्व की कुंभ परंपरा के अनुसार ही फैसला लिया जाएगा।

जहां तक अखाड़ा परी के शिविर के लिए जमीन की मांग का सवाल है, उस पर मेलाधिकारी का कहना है कि जमीन के लिए आए सभी आवेदनों पर विचार कर जमीन आवंटित की जाती है। अगर कोई मांग आती है, तो उस पर विचार किया जाएगा।

परी अखाड़े की मांग और अर्द्धकुंभ मेला प्रशासन के अखाड़े की तरफ से किसी भी तरह की मांग से इनकार करने से साफ है कि प्रशासन इस पूरे मामले को जब तक संभव हो टालना चाहता है। अब जब अर्द्धकुंभ मेला शुरू हो चुका है, देखना होगा कि अखिर मेला प्रशासन अखाड़ा परी के लिए अलग से स्नान की अनुमति देता है या नहीं।