मधेसी आंदोलन की फाइल फोटो

उत्तराखंड की चीन और नेपाल से सटी 600 किलोमीटर लंबी सीमा सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। रिटायर्ड ले. जनरल एमसी भंडारी मानते हैं कि नेपाल में चल रहा गतिरोध उत्तराखंड के लिए भी खतरा साबित हो सकता है। बावजूद इसके राज्य के पास अपनी कोई सामरिक रणनीति नहीं है। खास बात यह कि सुरक्षा जैसे गंभीर विषय के लिए कोई एडवाइजरी कमेटी (विशेष सलाहकार परिषद) तक गठित नहीं की गई है।

जनरल एमसी भंडारी ने सोमवार को अस्थायी राजधानी देहरादून के सुभाष रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से अनौपचारिक वार्ता करते हुए कहा कि सुरक्षा के लिहाज से राज्य में एक एडवाइजरी कमेटी होनी चाहिए। एडवाइजरी कमेटी सीधे मुख्यमंत्री के आधीन हो और अन्य हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

जनरल भंडारी ने पड़ोसी देश नेपाल में चल रहे मधेशी आंदोलन के संदर्भ में कहा कि नेपाल में चल रहे आंदोलन का बुरा असर किसी न किसी रूप में उत्तराखंड पर भी पड़ सकता है। चिंता इस बात की है कि आंदोलित मधेशियों ने अब हथियार उठाने शुरू कर दिए हैं।

अगर नेपाल आर्मी मधेशियों को खदेड़ती है तो वह सीमा पार कर उत्तराखंड में प्रवेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल सीमा पर होने वाली हर उथल-पुथल पर चीन व पाकिस्तान की भी निगाह टिकी रहती है। वह इस बावत राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को पत्र भेजेंगे।

ले. जनरल एमसी भंडारी का कहना है कि भारत व पाकिस्तान के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल बने ऐसी उम्मीद करना जल्दबाजी होगा। साल 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के विशेष रणनीतिकारों में शामिल रहे जनरल भंडारी का कहना है कि रिश्तों की डोर मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद होता रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहौर जाकर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय जगत में अच्छा संदेश दिया कि पाक के साथ दोस्ताना संबंध बनाने के लिए भारत तैयार है।