उत्तराखंड में जल्द ही एशिया के सबसे ऊंचे रोपवे का काम शुरू हो जाएगा। यह रोपवे तीन साल में तैयार होगा। चमोली जिले में हेमकुंड-घांघरिया रोपवे परियोजना का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा। उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट कंपनी (यूआईपीसी) को परियोजना सहयोगी मिल गया है। इसके साथ ही कंपनी को दो जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के काम को भी आगे बढ़ाने में सफलता मिली है। अब मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह इस कंपनी के चेयरमैन हैं।

मंगलवार को सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि हेमकुंड-घांघरिया रोपवे एशिया में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित रोपवे होगा। इस रोपवे को तीन साल में तैयार किया जाना है।

यहीं पर घांघरिया से लेकर गोंविदघाट तक का रोपवे भी तैयार किया जा रहा है। गोविंदघाट रोपवे का सर्वे हो गया है। दस किलोमीटर तक के इस रोपवे की डीपीआर तैयार की जा रही है।

देहरादून-मसूरी रोपवे के बारे में बताया गया कि पुरुकुल गांव से हाथीपांव तक छह किमी की निविदा पहले चरण के लिए तैयार है। इसमें पुरुकुल गांव की दो हेक्टेयर और हाथीपांव की पांच हेक्टयर भूमि ली जाएगी। यह भूमि पर्यटन विभाग की है। इस पर हट, जार्ज एवरेस्ट म्यूजियम, पार्किंग आदि पर्यटन संबंधी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इसी तरह निजी क्षेत्र की सहभागिता से लघु जल विद्युत परियोजनाएं विकसित करने के लिए निविदा आमंत्रित की गई थीं। 11.10 मेगावाट क्षमता की सेरागाड़, 19.80 मेगावाट की बालगाड़ और एक मेगावाट की बिरथी परियोजनाएं विकसित होनी थी। बालगाड़ परियोजना के लिए प्राइवेट पार्टनर का चयन कर लिया गया है।

तय किया गया कि बिरथी परियोजना राज्य सरकार की माइक्रो मिनी पावर पॉलिसी 2015 के तहत पंचायतों के अधीन विकसित की जाएगी। यह परियोजना उरेडा को दे दी गई है। सेरागाड़ परियोजना की निविदा दोबारा आमंत्रित की जाएंगी।