सांकेतिक तस्वीर

उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में परिवहन निगम अब अपनी माली हालत को सुधारने को बेताब नजर आ रहा है। परिवहन निगम के अधिकारी बसों में जीपीएस लगाने की कवायद कर रहे हैं, जिससे बसों के पल-पल की जानकारी मिलती रहे।

इसके लिए सरकारी स्तर पर तैयारी की जा रही है कि कैसे बसों में जीपीएस को लगाया जाएगा। इसका सर्वर रूम कहां स्थापित होगा आदि। परिवहन निगम बोर्ड के उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता का कहना है कि राज्य में करीब 1200 बसों का परिवहन विभाग संचालन करता है। मगर सैंकडों बसें कई-कई घंटे देरी से चलती हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं होता है।

ऐसे में फैसला किया गया है कि अब परिवहन निगम के बसों को आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा, जिससे बसों के मूवमेंट की सही जानकारी यात्रियों को उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही बसों के अनावश्यक क्यों लेट होती है उस पर अंकुश लगाया जा सके। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि जल्द कुछ बसों में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर जीपीएस को लगाया जाएगा।

गौरतलब है कि परिवहन निगम अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए हर हत्थकंडे अपना रहा है। मगर निगम के अधिकारी राजस्व को नहीं बढ़ा पा रहे हैं। बड़ा सवाल है कि करोड़ों रुपये खर्च करके कैसे अधिकारी अपने राजस्व को बढ़ाएंगे। क्योंकि 1200 बसों में जीपीएस लगाना भी कम खर्चीला नहीं है और वह भी उस दशा में जब परिवहन निगम खुद करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहा है।

फिलहाल परिवहन निमग बोर्ड के उपाध्यक्ष का कहना है कि सरकार की मंशा साफ है कि राज्यवासियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं बसों में मिलनी चाहिए, इसके लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है।